सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी पैनलों में महिला वकीलों के लिए 30% आरक्षण की मांग पर केंद्र-राज्यों से मांगा जवाब
सरकारी पैनलों में महिला वकीलों को 30% आरक्षण की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-राज्यों से मांगा जवाब

Image: Jagran
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी पैनलों और विधि अधिकारियों के पदों पर महिला वकीलों के लिए 30% आरक्षण की मांग वाली याचिका पर केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है। यह कदम न्याय प्रणाली में लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है, जहां महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने 'लाडली फाउंडेशन ट्रस्ट' द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की है, जिसमें महिला वकीलों के लिए 30% आरक्षण की मांग की गई है।
- 02महिला वकीलों की संख्या केवल 15.31% है, जबकि 15.4 लाख नामांकित वकीलों में से केवल 2.84 लाख महिलाएं हैं।
- 03कोर्ट ने बताया कि पिछले 35 वर्षों में केवल 11 महिलाएं ही सुप्रीम कोर्ट की जज बनी हैं।
- 04याचिका में कहा गया है कि 75 वर्षों में कोई महिला भारत की अटार्नी जनरल या सालिसिटर जनरल नहीं बनी है।
- 05सीजेआई सूर्यकांत ने एक वाकया साझा किया, जिसमें बताया गया कि तेलंगाना में 19,000 वकीलों में से केवल एक महिला को पद पर जगह मिली है।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी पैनलों और विधि अधिकारियों के पदों पर महिला वकीलों के लिए न्यूनतम 30% आरक्षण की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र और सभी राज्यों से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह कदम उठाया है, जिससे न्याय प्रणाली में लैंगिक असमानता को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सके। याचिका में उल्लेख किया गया है कि आजादी के 75 वर्षों के बाद भी, भारत में कोई महिला अटार्नी जनरल या सालिसिटर जनरल नहीं बनी है। इसके अलावा, पिछले 35 वर्षों में केवल 11 महिलाएं ही सुप्रीम कोर्ट की जज बनी हैं, जबकि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में केवल 5.88% और उच्च न्यायालयों में लगभग 13.76% महिला जज हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट पैनल, उच्च न्यायालय पैनल और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में महिलाओं को 30% आरक्षण देने के लिए दिशा-निर्देश बनाए जाएं, ताकि संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3), 19(1)(जी) और 21 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा हो सके।
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यदि यह आरक्षण लागू होता है, तो इससे महिला वकीलों की संख्या में वृद्धि होगी और न्याय प्रणाली में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
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