पश्चिमी देशों का भारत के प्रति नस्लवादी दृष्टिकोण: नॉर्वे के कार्टून पर प्रतिक्रिया
DNA: भारत के खिलाफ पश्चिमी देशों का 'नस्लवाद', 'जहरीले सांप' का DNA टेस्ट

Image: Zee News
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नॉर्वे के एक प्रमुख अखबार द्वारा 'सपेरा' बताने वाले कार्टून ने भारतीय मीडिया और बुद्धिजीवियों के बीच तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। इस लेख में भारत की वैज्ञानिक और आर्थिक उपलब्धियों के संदर्भ में पश्चिमी देशों की संकीर्ण सोच का आलोचना की गई है, जो भारत को पुरानी रूढ़ियों से देखते हैं।
- 01नॉर्वे के अखबार आफ्टेनपोस्टेन ने प्रधानमंत्री मोदी को 'सपेरा' बताया, जो भारत के प्रति नस्लवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
- 02भारत हर साल 25 से 30 लाख STEM ग्रेजुएट्स का उत्पादन करता है, जो नॉर्वे की आधी जनसंख्या के बराबर है।
- 03भारत की अर्थव्यवस्था 12 साल में 11वें से चौथे स्थान पर पहुंच गई है, जबकि GDP ग्रोथ 8.5% है।
- 04भारत में 54,000 से अधिक कॉलेज और 1,000 से ज्यादा पीएचडी संस्थान हैं, जबकि नॉर्वे में केवल 7 मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय हैं।
- 05प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में भारत को सपेरों का देश समझने वालों को स्पष्ट संदेश दिया था कि भारत वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों में अग्रणी है।
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नॉर्वे के अखबार आफ्टेनपोस्टेन द्वारा प्रकाशित एक कार्टून में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'सपेरा' बताने के बाद भारतीय मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। यह कार्टून भारत के प्रति पश्चिमी देशों की संकीर्ण सोच और नस्लवाद का प्रतीक है। लेख में बताया गया है कि भारत हर साल 25 से 30 लाख STEM ग्रेजुएट्स का उत्पादन करता है, जो नॉर्वे की आधी जनसंख्या के बराबर है। नॉर्वे के पत्रकारों की यह धारणा कि भारत एक 'सपेरों का देश' है, पूरी तरह से गलत है, जबकि भारत की अर्थव्यवस्था 12 साल में 11वें से चौथे स्थान पर पहुंच गई है और इसकी GDP ग्रोथ 8.5% है। भारत में 54,000 से अधिक कॉलेज और 1,000 से ज्यादा पीएचडी संस्थान हैं, जबकि नॉर्वे में केवल 7 मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में खड़े होकर भारत को सपेरों का देश समझने वालों को स्पष्ट संदेश दिया था। यह कार्टून भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों को नजरअंदाज करता है और पश्चिमी देशों की कुंठा को दर्शाता है।
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This incident highlights the need for greater awareness and understanding of India's achievements in science and technology among foreign media.
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