रुपये का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नया निचला स्तर, कच्चे तेल की कीमतों का असर
डॉलर के मुकाबले नए निचले स्तर पर रुपया, कच्चे तेल की महंगाई से दबाव
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सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.09 पर बंद हुआ, जो कि एक नया निचला स्तर है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की मजबूत मांग ने रुपये पर दबाव डाला है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) संभावित रूप से डॉलर की आवक बढ़ाने के लिए नई योजनाओं पर विचार कर रहा है।
- 01रुपया 95.09 के नए निचले स्तर पर बंद हुआ।
- 02कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि रुपये की कमजोरी का मुख्य कारण है।
- 03आरबीआई डॉलर की आवक बढ़ाने के लिए नई योजनाओं पर विचार कर रहा है।
- 04इस वर्ष रुपये की कीमत में 5.48% की गिरावट आई है।
- 05डॉलर की लगातार मांग के कारण रुपये पर दबाव बना रहेगा।
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सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.09 के नए निचले स्तर पर बंद हुआ, जो कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण हुआ। बाजार के जानकारों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डॉलर की बिक्री के माध्यम से अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया। पिछले हफ्ते, रुपया 94.92 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस वर्ष रुपये में 5.48% की गिरावट आई है, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में यह 0.29% टूटी है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत की व्यापार संतुलन पर दबाव बढ़ रहा है। आरबीआई संभावित रूप से फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (एफसीएनआर) योजना जैसी नई योजनाओं पर विचार कर रहा है, जिससे डॉलर की आवक बढ़ाई जा सके। यदि ऐसी योजना लागू होती है, तो यह रुपये पर दबाव को कम करने में मदद कर सकती है।
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रुपये की गिरावट से आयात महंगा होगा, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
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