AIADMK में पलानीस्वामी की स्थिति पर संकट, विजय की बढ़ती ताकत
विजय की चमक के आगे फीके पड़े पलानीस्वामी, AIADMK के वजूद पर संकट!
Aaj Tak
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अन्नाद्रमुक (AIADMK) के विधायक दल में फूट के चलते महासचिव एडप्पादी पलानीस्वामी (EPS) की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी की लगातार हार और विजय के उभरते प्रभाव ने पलानीस्वामी के भविष्य को संकट में डाल दिया है।
- 01AIADMK की लगातार चार हारों ने पलानीस्वामी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए।
- 02पार्टी के भीतर कई नेता पलानीस्वामी के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
- 03विजय ने युवा मतदाताओं को आकर्षित करने में सफलता पाई है।
- 04पलानीस्वामी की प्राथमिकताएँ और रणनीतियाँ गलत साबित हुईं।
- 05AIADMK के विभाजन से पार्टी की स्थिति और भी कमजोर हो सकती है।
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अन्नाद्रमुक (AIADMK) के विधायक दल में हाल ही में सामने आई फूट ने पार्टी महासचिव एडप्पादी पलानीस्वामी (EPS) की नेतृत्व क्षमता को चुनौती दी है। 2019 के बाद से लगातार चौथी हार के बाद, पार्टी के भीतर कई नेता पलानीस्वामी से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। मुख्य विपक्षी नेता विजय ने युवा मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में सफलता पाई है, जबकि पलानीस्वामी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने में संघर्ष कर रहे हैं। हार की प्रमुख वजहों में प्रभावी नैरेटिव की कमी, गलत प्राथमिकताएँ और भाजपा के साथ गठबंधन शामिल हैं। यदि AIADMK में विभाजन होता है, तो विजय की पार्टी 'टीवीके' (TVK) नई अन्नाद्रमुक बनकर उभर सकती है, जिससे द्रमुक और अन्नाद्रमुक के एकाधिकार का अंत हो सकता है। पलानीस्वामी को अब अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए नई रणनीतियों पर विचार करना होगा।
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AIADMK में फूट और विजय की बढ़ती ताकत से तमिलनाडु की राजनीति में बदलाव आ सकता है, जिससे मतदाताओं की प्राथमिकताएँ और राजनीतिक गठबंधन प्रभावित होंगे।
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