2026 विधानसभा चुनाव में NDA की ऐतिहासिक जीत, आरक्षित सीटों पर भी बढ़त
चुनावी रण में खिला 'कमल', आरक्षित सीटों पर भी NDA की जीत का परचम
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2026 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगियों ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। असम से लेकर पश्चिम बंगाल तक, भाजपा ने 207 सीटों के साथ इतिहास रचा, जिससे हाशिए पर खड़े समुदायों का विश्वास मजबूत हुआ है।
- 01भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 68 एससी सीटों में से 51 और सभी 16 एसटी सीटें जीतीं।
- 02असम में राजग ने सभी 18 एसटी सीटों पर जीत दर्ज की।
- 03तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक ने 9 एससी और 1 एसटी सीट जीती।
- 04आरक्षित सीटों पर जीत ने भाजपा को सामाजिक न्याय की नई परिभाषा गढ़ने में मदद की।
- 05चुनाव परिणामों ने दिखाया कि आरक्षित सीटें अब किसी एक दल की जागीर नहीं रहीं।
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2026 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगियों ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों पर अभूतपूर्व जीत हासिल की है। पश्चिम बंगाल में, भाजपा ने 68 एससी सीटों में से 51 पर जीत दर्ज की और सभी 16 एसटी सीटें जीतीं। इस जीत ने ममता बनर्जी के 15 वर्षों के शासन का अंत किया और भाजपा को 207 सीटों के साथ ऐतिहासिक सफलता दिलाई। असम में भी, भाजपा के सहयोगी राजग ने सभी 18 एसटी सीटों पर विजय प्राप्त की और नौ एससी सीटों में से 8 पर जीत हासिल की। दक्षिण भारत में, अन्नाद्रमुक ने तमिलनाडु में 9 एससी और 1 एसटी सीट जीती। ये परिणाम दिखाते हैं कि आरक्षित सीटें अब किसी एक दल की जागीर नहीं रहीं, बल्कि विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की आकांक्षा और सांस्कृतिक पहचान के सम्मान ने भाजपा को इन क्षेत्रों में मजबूत किया है।
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इस चुनावी जीत से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के समुदायों में भाजपा के प्रति विश्वास बढ़ा है, जिससे उनके विकास और सामाजिक न्याय की आकांक्षाएं पूरी हो सकेंगी।
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