पीएचडी छात्र ने सुलझाई रहस्यमयी रेडियो सिग्नल की पहेली
PhD छात्र ने वो कर दिखाया, जो सालों से नहीं कर पाए वैज्ञानिक; कैसे सुलझी सालों पुरानी रहस्यमयी सिग्नल की पहेली

Image: Zee News
एक पीएचडी छात्र कोवी रोज के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने एक रहस्यमयी रेडियो सिग्नल के स्रोत का पता लगाया है, जो हमारी आकाशगंगा में दो तारों की प्रणाली से आता है। यह सिग्नल हर 1.4 घंटे में दोहराता है और इससे लॉन्ड-पीरियड रेडियो ट्रांजिएंटेस के बारे में नई जानकारियाँ मिलेंगी।
- 01कोवी रोज (पीएचडी छात्र) ने ASKAP रेडियो टेलीस्कोप की मदद से सिग्नल का स्रोत खोजा।
- 02सिग्नल एक व्हाइट ड्वार्फ और एक छोटे लाल तारे की जोड़ी से उत्पन्न होता है।
- 03यह सिग्नल हर 1.4 घंटे में दोहराता है, जिससे इसे रहस्यमयी माना जाता था।
- 04व्हाइट ड्वार्फ का द्रव्यमान सूर्य के करीब है, जबकि साथी लाल तारा सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 10% है।
- 05इस खोज से ब्रह्मांड में अन्य रहस्यमयी रेडियो संकेतों की उत्पत्ति को समझने में मदद मिलेगी।
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अंतरिक्ष में कई रहस्यमयी संकेतों की खोज में, ऑस्ट्रेलिया के एक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कोवी रोज (पीएचडी छात्र) के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने एक रहस्यमयी रेडियो सिग्नल के स्रोत का पता लगाया है, जो हमारी आकाशगंगा में दो तारों की विशेष प्रणाली से उत्पन्न होता है। यह सिग्नल एक व्हाइट ड्वार्फ और एक छोटे लाल तारे की जोड़ी से आ रहा है, जिसमें व्हाइट ड्वार्फ अपने साथी तारे से पदार्थ खींचता है। जब यह पदार्थ गिरता है, तो यह एक्स-रे उत्सर्जित करता है और दोनों तारों के बीच की चुंबकीय गतिविधियां रेडियो तरंगें उत्पन्न करती हैं। यह सिग्नल हर 1.4 घंटे में दोहराता है, जिससे इसे पहले एक रहस्यमयी संकेत माना जाता था। इस खोज से वैज्ञानिकों को लॉन्ड-पीरियड रेडियो ट्रांजिएंटेस के बारे में नई जानकारियाँ मिलेंगी, और इससे अन्य रहस्यमयी रेडियो संकेतों की उत्पत्ति को समझने में मदद मिलेगी।
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इस खोज से वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड में मौजूद अन्य रहस्यमयी रेडियो संकेतों को समझने में मदद मिलेगी।
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