अंटार्कटिका के ब्लड फॉल्स: खून जैसे लाल पानी का रहस्य
अंटार्कटिका ग्लेशियर में बहता है खून जैसा लाल पानी, क्या है ब्लड फॉल्स का रहस्य

Image: Zee News
अंटार्कटिका में टेलर ग्लेशियर से निकलने वाला लाल पानी, जिसे ब्लड फॉल्स कहा जाता है, असल में एक प्राचीन नमकीन झील से आता है। यह झील 1300 फीट नीचे स्थित है और इसमें आयरन की उच्च मात्रा के कारण पानी का रंग लाल हो जाता है।
- 01ब्लड फॉल्स की खोज 1911 में ऑस्ट्रेलियाई भूवैज्ञानिक ग्रिफिथ टेलर ने की थी।
- 02यह झरना 15 से 20 साल पुरानी प्राचीन नमकीन झील से पानी प्राप्त करता है।
- 03पानी का लाल रंग आयरन और ऑक्सीजन के बीच के रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण होता है।
- 04टेलर ग्लेशियर का आकार बढ़ने के कारण यह झील बर्फ के नीचे दब गई है।
- 05यहां का पानी ठंड में भी नहीं जमता क्योंकि यह खारा है।
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अंटार्कटिका में स्थित टेलर ग्लेशियर से बहने वाला लाल पानी, जिसे ब्लड फॉल्स के नाम से जाना जाता है, एक अनोखी प्राकृतिक घटना है। इसकी खोज 1911 में ऑस्ट्रेलियाई भूवैज्ञानिक ग्रिफिथ टेलर ने की थी। पहले इसे विशेष रेड एल्गा का परिणाम माना गया, लेकिन वैज्ञानिक अनुसंधान से पता चला कि यह पानी 1300 फीट नीचे स्थित एक प्राचीन नमकीन झील से आता है। इस झील में आयरन की उच्च मात्रा होती है, जो ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण लाल रंग का हो जाता है। इस प्रक्रिया के चलते, झरने का पानी बर्फ से गिरते समय खून जैसा दिखाई देता है। यह झरना ठंड में भी नहीं जमता क्योंकि इसका पानी खारा है, जिससे यह घटना विज्ञान के लिए एक अद्भुत अध्ययन का विषय बन गई है।
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