कांवट: 500 साल पुराना मंदिर और ऐतिहासिक धरोहर का केंद्र
कांतली नदी के किनारे बसा इतिहास का खजाना! 500 साल पुराने मंदिर वाला कांवट क्यों बन रहा है चर्चा का केंद्र?
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कांवट, सीकर का एक ऐतिहासिक कस्बा है, जो कांतली नदी के किनारे बसा है। यहां का 500 साल पुराना श्री सीताराम जी मंदिर और भामाशाहों की हवेलियां इसे खास बनाती हैं। किसान अब प्याज की खेती कर रहे हैं, जबकि पहले गन्ने की खेती होती थी।
- 01कांवट कस्बा सीकर जिले में स्थित है और इसे भामाशाहों की भूमि कहा जाता है।
- 02यहां का श्री सीताराम जी मंदिर 500 साल पुराना है और इसकी पूजा-अर्चना वर्तमान में मधुसूदन पुजारी करते हैं।
- 03कस्बे में लगभग 2000 बीघा में प्याज की खेती होती है, जो जयपुर, दिल्ली और गुड़गांव की मंडियों में बेची जाती है।
- 04कांवट में हवेलियों की आला-गीला शैली की नक्काशी आकर्षण का केंद्र है।
- 05कस्बे में हिंगलाज माता और गढ़बालाजी मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं।
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कांवट, जो सीकर जिले में कांतली नदी के तट पर बसा है, ऐतिहासिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसे भामाशाहों की भूमि माना जाता है, जहां प्राचीन मंदिर और हवेलियां इसकी पहचान हैं। यहां का श्री सीताराम जी मंदिर, जो लगभग 500 साल पुराना है, धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर की पूजा वर्तमान में मधुसूदन पुजारी द्वारा की जाती है। पहले इस क्षेत्र में गन्ने की खेती होती थी, लेकिन कांतली नदी के सूखने के बाद, किसान अब प्याज की खेती कर रहे हैं, जो लगभग 2000 बीघा में फैली हुई है। प्याज का उत्पादन जयपुर, दिल्ली और गुड़गांव की मंडियों में बेचा जाता है। कांवट में पुरातन हवेलियों की आला-गीला शैली की नक्काशी भी लोगों को आकर्षित करती है। इसके अलावा, हिंगलाज माता और गढ़बालाजी मंदिर जैसे धार्मिक स्थल भी यहां की सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करते हैं।
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कांवट में प्याज की खेती से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
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