धार में 721 साल बाद महाआरती का आयोजन, हाईकोर्ट के फैसले से बढ़ा धार्मिक उत्साह
धार में 721 साल बाद महाआरती, फैसले के बाद वाग्देवी पूजा को लेकर उत्साह
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मध्य प्रदेश के धार जिले में भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित करने के बाद 721 साल बाद महाआरती का आयोजन किया गया। हाईकोर्ट के फैसले के चलते मुस्लिम समुदाय को परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं है, जिसके कारण सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
- 01हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित किया है, जिससे मुस्लिम समुदाय को नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं है।
- 02महाआरती का आयोजन 2003 के बाद पहली बार शुक्रवार को किया गया है।
- 03धार शहर में 2000 से अधिक पुलिस जवानों को तैनात किया गया है ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- 04मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका (SLP) दायर की है, जिसमें हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।
- 05मुस्लिम नेताओं ने शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि वे न्याय व्यवस्था का सम्मान करते हैं।
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मध्य प्रदेश के धार जिले में भोजशाला परिसर को मंदिर घोषित करने के बाद 721 साल बाद महाआरती का आयोजन किया गया, जो कि 2003 के बाद पहली बार हो रहा है। हाईकोर्ट के 15 मई के फैसले के बाद अब मुस्लिम समुदाय को परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं है, जिससे सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने पूरे धार शहर में 2000 से अधिक पुलिस जवानों को तैनात किया है। कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा ने कहा है कि अदालत के आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि वे इस परिसर में लंबे समय से नमाज पढ़ते आ रहे हैं। मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले पर रोक लगाने की उम्मीद जताई है। इस बीच, मुस्लिम नेताओं ने शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई नया आदेश नहीं आता, तब तक कोई भी व्यक्ति भोजशाला परिसर में नमाज नहीं पढ़ेगा।
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इस फैसले से धार जिले में धार्मिक गतिविधियों में बड़ा बदलाव आया है, जिससे स्थानीय समुदायों के बीच तनाव बढ़ सकता है।
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