उत्तर प्रदेश में बिजली कटौती से ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ीं
बिजली कटौती से ग्रामीण परेशान, गांवों में सिर्फ 8 घंटे सप्लाई का दावा

Image: Globalherald
उत्तर प्रदेश में बिजली कटौती ने ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर समस्याएँ उत्पन्न कर दी हैं, जहां केवल 8 से 10 घंटे बिजली मिल रही है। अधिकारियों के अनुसार, बिजली की मांग और वितरण संसाधनों के बीच बड़ा अंतर है, जिससे अघोषित कटौती हो रही है। इस संकट का मुख्य कारण गर्मी में बढ़ती मांग और बिजली चोरी है।
- 01उत्तर प्रदेश में 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं, जिनका कुल स्वीकृत लोड 8.57 करोड़ किलोवाट है, जबकि वितरण क्षमता केवल 6.25 करोड़ किलोवाट है।
- 02गर्मी के कारण बिजली की अधिकतम मांग 33,000 मेगावाट तक पहुँचने का अनुमान है।
- 03ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 8 से 10 घंटे बिजली मिल रही है, जबकि शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे की आपूर्ति का दावा किया गया है।
- 04बिजली कटौती के लिए सोशल मीडिया पर 'सीक्रेट कोड' का उपयोग किया जाता है।
- 05ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि राज्य में बिजली आपूर्ति का नया कीर्तिमान स्थापित किया जा रहा है।
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उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के कारण बिजली कटौती से ग्रामीण क्षेत्रों में हाहाकार मचा हुआ है। ग्रामीण इलाकों में केवल 8 से 10 घंटे बिजली मिल रही है, जबकि शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे की आपूर्ति का दावा किया गया है। इस संकट का मुख्य कारण बिजली की मांग और वितरण संसाधनों के बीच 2 करोड़ किलोवाट का बड़ा अंतर है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मी में बढ़ती मांग के कारण अघोषित कटौती की जा रही है। इस दौरान, बिजली चोरी और ओवरलोडिंग भी समस्या को बढ़ा रहे हैं। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने इस स्थिति को लेकर कहा कि राज्य सरकार बिजली आपूर्ति में नया कीर्तिमान बना रही है और लगातार नए सब-स्टेशनों का निर्माण कर रही है। हालाँकि, विशेषज्ञों का सुझाव है कि बिजली विभाग को जवाबदेही तय करनी चाहिए और कर्मचारियों की छंटनी को रोकना चाहिए। यदि यह स्थिति बनी रही, तो ग्रामीणों को और अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
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बिजली कटौती से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत और छोटे उद्योगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
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