सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संप्रभुता के बीच प्राथमिकता तय की
व्यक्तिगत स्वतंत्रता के आगे देश की संप्रभुता हमारी प्राथमिकता, ड्रग्स मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
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Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश की संप्रभुता व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्राथमिकता रखती है, विशेषकर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनएडीपीएस) मामलों में। यह टिप्पणी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जमानत आदेश को रद करते हुए की गई।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संप्रभुता को प्राथमिकता दी जाएगी जब व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संप्रभुता में टकराव हो।
- 02यह टिप्पणी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जमानत आदेश को रद करते हुए की गई।
- 03जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि ड्रग्स की आपूर्ति देश की आर्थिकी और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है।
- 04आरोपित ने एक वर्ष और सात महीने जेल में बिताए हैं, लेकिन उसे 20 वर्ष तक की सजा हो सकती है।
- 05संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत दखल का मामला नहीं बनता।
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि देश की संप्रभुता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच कोई टकराव होता है, तो संप्रभुता को प्राथमिकता दी जाएगी। यह टिप्पणी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को रद करते हुए की गई, जिसमें एक आरोपित को जमानत दी गई थी, जिसने जेल के अंदर से ड्रग्स तस्करी का नेटवर्क चलाया था। जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि ड्रग्स की आपूर्ति देश की आर्थिकी और लोगों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपित ने केवल एक वर्ष और सात महीने जेल में बिताए हैं, जबकि उसे 20 वर्ष तक की सजा हो सकती है, इसलिए संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत दखल का मामला नहीं बनता।
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इस निर्णय से ड्रग्स से संबंधित मामलों में जमानत के नियमों पर प्रभाव पड़ेगा।
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