16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या, शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का महत्व
16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या, शनि जयंती और वट सावित्री व्रत, शुभ योग के साथ आज ही जानें कल के शुभ-अशुभ समय
News 18 Hindi
Image: News 18 Hindi
16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या, शनि जयंती और वट सावित्री व्रत एक साथ मनाए जाएंगे, जो हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखते हैं। इस दिन पूजा, हवन और तर्पण के माध्यम से भक्त पितरों और शनिदेव को प्रसन्न करने का प्रयास करेंगे। विभिन्न शुभ मुहूर्त और योग इस दिन के महत्व को और बढ़ाते हैं।
- 01ज्येष्ठ अमावस्या 16 मई को सुबह 5:11 बजे शुरू होकर 17 मई को 1:30 बजे तक रहेगी।
- 02वट सावित्री व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है।
- 03शनि जयंती पर शनि दोष से मुक्ति के लिए विशेष पूजा और दान का महत्व है।
- 04अशुभ समय में राहुकाल सुबह 8:54 से 10:36 बजे तक रहेगा, जबकि शुभ मुहूर्त सुबह 4:07 से 4:48 बजे तक है।
- 05300 साल बाद शश महापुरुष योग, गजकेसरी योग, बुद्धादित्य योग, सौभाग्य योग और शोभन योग का दुर्लभ संयोग बनेगा।
Advertisement
In-Article Ad
16 मई को ज्येष्ठ अमावस्या, शनि जयंती और वट सावित्री व्रत का आयोजन होगा, जो हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्येष्ठ अमावस्या का दिन पितरों की शांति और तर्पण के लिए विशेष रूप से शुभ होता है। इस दिन विवाहित महिलाएं वट सावित्री व्रत रखकर अपने पतियों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। शनि जयंती पर भक्त शनिदेव की पूजा, हवन और तेलाभिषेक करते हैं, जिससे शनि दोष से मुक्ति मिलती है। इस दिन विशेष शुभ योग भी बन रहे हैं, जैसे शश महापुरुष योग और गजकेसरी योग, जो पूजा-अर्चना के लिए अनुकूल माने जाते हैं। शुभ मुहूर्त सुबह 4:07 से 4:48 बजे तक रहेगा, जबकि अशुभ समय सुबह 8:54 से 10:36 बजे तक राहुकाल है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का भी विशेष महत्व है, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है।
Advertisement
In-Article Ad
इस विशेष दिन पर पूजा और व्रत करने से भक्तों को पारिवारिक सुख और शांति की प्राप्ति होती है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आप वट सावित्री व्रत का पालन करते हैं?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।



