मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का भोजशाला परिसर को मंदिर मानने का ऐतिहासिक फैसला
भोजशाला में अयोध्या का फैसला बना नजीर, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गिनाए वो 10 सिद्धांत, जो मंदिर-मस्जिद विवाद में अहम साबित हुए
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर मानते हुए अयोध्या मामले में स्थापित 10 सिद्धांतों का पालन किया। अदालत ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्य और धार्मिक आस्था के आधार पर निर्णय लिया गया है, जिससे विवाद का अंत हुआ। इस फैसले ने हिंदू समुदाय की पूजा के अधिकार को मान्यता दी है।
- 01अदालत ने स्पष्ट किया कि पुरातात्विक व्याख्या एक बहु-विषयी वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
- 02भोजशाला में हिंदू समुदाय की लगातार पूजा का प्रमाण मौजूद है।
- 03मुस्लिम समुदाय को नमाज़ के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया।
- 04अदालत ने 2003 के ASI आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पूजा और नमाज़ के लिए समय निर्धारित किया गया था।
- 05सरकार की जिम्मेदारी है कि धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
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मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर को मंदिर मानने का फैसला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सुनाया। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या मामले में स्थापित 10 सिद्धांतों पर आधारित है। अदालत ने कहा कि पुरातात्विक साक्ष्य और धार्मिक आस्था के आधार पर निर्णय लिया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों के मूल्यांकन में वैज्ञानिक और ऐतिहासिक साक्ष्यों पर भरोसा किया जा सकता है। इस फैसले में हिंदू समुदाय की पूजा के अधिकार को मान्यता दी गई है। अदालत ने मुस्लिम समुदाय को नमाज़ के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने का सुझाव दिया और 2003 के ASI आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पूजा और नमाज़ के लिए समय निर्धारित किया गया था। इसके अलावा, अदालत ने सरकार की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया कि वह धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करे।
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इस फैसले से हिंदू समुदाय को भोजशाला में पूजा करने का अधिकार मिला है, जिससे धार्मिक आस्था को मान्यता मिली है।
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