झारखंड में राशन कार्ड का मोबाइल लिंकेज सिर्फ 30%: पलायन का संकट
Jharkhand में घर-घर राशन का दावा, पर सिर्फ 30% राशन कार्ड ही मोबाइल से लिंक; रोजगार के लिए पलायन कर रहे पूरे परिवार
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झारखंड में राशन कार्डधारकों के मोबाइल और आधार लिंकेज की स्थिति गंभीर है, जहां केवल 30.17% कार्ड मोबाइल से जुड़े हैं। रोजगार की तलाश में कई परिवार गांव छोड़ रहे हैं, जिससे जन वितरण प्रणाली (PDS) प्रभावित हो रही है।
- 01झारखंड में राशन कार्ड का मोबाइल लिंकेज औसत 30.17% है।
- 02पश्चिमी सिंहभूम जिले में मोबाइल लिंकेज की स्थिति सबसे खराब है, केवल 21.41%।
- 03रांची में मोबाइल लिंकेज 42.55% के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
- 04पलायन के कारण जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों को कार्डधारक नहीं मिल रहे हैं।
- 05खाद्य आपूर्ति विभाग पलायन कर चुके परिवारों का डेटा अपडेट करने के लिए ठोस कदम उठाने की योजना बना रहा है।
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झारखंड में सरकार द्वारा हर घर तक राशन पहुंचाने के दावे के बावजूद, राशन कार्डधारकों का मोबाइल और आधार लिंकेज केवल 30.17% है। पश्चिमी सिंहभूम जिले की स्थिति सबसे खराब है, जहां मोबाइल लिंकेज मात्र 21.41% है। रोजगार की तलाश में कई परिवार गांवों से पलायन कर चुके हैं, जिससे जन वितरण प्रणाली (PDS) प्रभावित हो रही है। अधिकारियों के अनुसार, पलायन के कारण कार्डधारकों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। रांची में मोबाइल लिंकेज 42.55% के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, जबकि देवघर और गुमला जैसे जिलों में यह आंकड़ा 20% से भी कम है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत, विभाग को पारदर्शिता लाने के लिए शत-प्रतिशत आधार और मोबाइल लिंकेज सुनिश्चित करना होगा।
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पलायन के कारण राशन वितरण प्रणाली प्रभावित हो रही है, जिससे गरीब परिवारों को राशन प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है।
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