भारत की नई हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में मिली सफलता, DRDO ने किया स्क्रैमजेट इंजन का परीक्षण
भारत के जखीरे में जल्द शामिल होंगी अजेय हाइपरसोनिक मिसाइलें, DRDO ने किया स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण
Jagran
Image: Jagran
भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है, जिसमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल 6100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ान भर सकती है और इसे ट्रैक करना मुश्किल होगा।
- 01DRDO ने स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण किया है।
- 02यह मिसाइल 6100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ान भरने में सक्षम है।
- 03भारत अब हाइपरसोनिक तकनीक में अमेरिका, रूस और चीन के साथ शामिल हो गया है।
- 04स्क्रैमजेट तकनीक से मिसाइल की गति और मारक क्षमता में वृद्धि होती है।
- 05रक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि पर बधाई दी है और भविष्य में रक्षा सहयोग की संभावनाएं बढ़ी हैं।
Advertisement
In-Article Ad
भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिसमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 'एक्टिवली कूल्ड फुलस्केल स्क्रैमजेट कंबस्टर' का सफल परीक्षण किया। यह स्क्रैमजेट इंजन 6100 किलोमीटर प्रति घंटे (मैक 5+) की गति से उड़ान भरने में सक्षम है। हाल ही में, हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) में इस इंजन का परीक्षण 1200 सेकंड तक सफलतापूर्वक किया गया। इससे पहले जनवरी में 700 सेकंड का परीक्षण किया गया था। इस सफलता के साथ, भारत अब अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के साथ हाइपरसोनिक तकनीक में शामिल हो गया है। हाइपरसोनिक मिसाइलों की खासियत यह है कि वे तेज गति के साथ दिशा बदल सकती हैं, जिससे दुश्मन के रडार और मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए उन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर बधाई दी है, जो भारत की रक्षा क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करती है और भविष्य में मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग की संभावनाएं बढ़ा सकती है।
Advertisement
In-Article Ad
यह विकास भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा और भविष्य में वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को बढ़ाएगा।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि भारत को हाइपरसोनिक मिसाइलों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए?
Connecting to poll...
More about रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




-1778379001170.webp&w=1200&q=75)
