ब्रिक्स की बैठक में भारत का रुख: अमेरिका के साथ व्यापार प्राथमिकता
BRICS में दिखेगा भारत का दबदबा: अमेरिका के साथ कारोबार प्राथमिकता, डॉलर को लेकर क्या है रुख?
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भारत की अध्यक्षता में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में चीन और रूस के दबाव के बावजूद, भारत ने डॉलर के खिलाफ कोई ठोस प्रस्ताव नहीं देने का निर्णय लिया है। अमेरिका के साथ भारत का सालाना कारोबार लगभग 200 अरब डॉलर है, और द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता दी जा रही है।
- 01भारत ब्रिक्स बैठक में डॉलर के खिलाफ कोई ठोस प्रस्ताव नहीं लाएगा।
- 02भारत का अमेरिका के साथ सालाना कारोबार लगभग 200 अरब डॉलर है।
- 03चीन और रूस स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
- 04भारत ने आधिकारिक रूप से डॉलर से अलग होने का कोई योजना नहीं बनाई है।
- 05रूस के साथ भारत का 95% कारोबार अब स्थानीय मुद्राओं में हो रहा है।
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भारत की अध्यक्षता में 14-15 मई को होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में चीन और रूस द्वारा गैर-डॉलरीकरण को बढ़ावा देने का दबाव है। हालांकि, भारत ने इस प्रस्ताव पर कोई उत्साह नहीं दिखाया है और अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार को प्राथमिकता दी है। भारत का अमेरिका के साथ सालाना कारोबार लगभग 200 अरब डॉलर है, और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी मजबूत है। बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान में स्थानीय मुद्राओं में कारोबार को बढ़ावा देने के लिए कोई ठोस टिप्पणी की उम्मीद नहीं है। भारत ने स्पष्ट किया है कि उसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर से अलग होने का कोई प्लान नहीं है। रूस के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि भारत के साथ उसका 95% कारोबार अब स्थानीय मुद्राओं में हो रहा है। भारत ने ब्रिक्स और गैर-ब्रिक्स देशों के साथ स्थानीय मुद्रा में कारोबार बढ़ाने की नीति पर काम किया है, लेकिन इस बार कोई नया ठोस प्रस्ताव या समयबद्ध रोडमैप शामिल होने की संभावना नहीं है।
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भारत के अमेरिका के साथ मजबूत व्यापारिक संबंधों से भारतीय व्यवसायों को लाभ मिलेगा।
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