सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को वैध ठहराया, चुनाव आयोग को मिले अधिकार
'SIR सही, यह चुनाव आयोग का अधिकार', सुप्रीम कोर्ट ने कहा- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए यह प्रक्रिया सही

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सुप्रीम कोर्ट ने विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को वैध मानते हुए चुनाव आयोग को नागरिकता की जांच का सीमित अधिकार दिया है। यह निर्णय विपक्षी दलों की आलोचनाओं के बीच आया है और इसे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है और यह निष्पक्ष चुनावों के लिए आवश्यक है।
- 02कोर्ट ने नागरिकता की जांच को सीमित अधिकार के रूप में मान्यता दी, लेकिन इसे नागरिकता का निर्धारण नहीं माना।
- 03एसआईआर प्रक्रिया के तहत 65 लाख नाम हटाए गए हैं, जो पिछले चार दशकों में बड़े पैमाने पर प्रवासन और शहरीकरण के कारण हैं।
- 04निर्णय में कहा गया कि मतदाता सूची की सटीकता और शुद्धता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।
- 05सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि नाम हटाने के मामलों को चार हफ्ते में सक्षम अधिकारियों को भेजा जाए।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए चुनाव आयोग को इसके संचालन का अधिकार दिया। यह निर्णय विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए सवालों के बीच आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एसआईआर के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को मतदाता सूची से बाहर किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को नागरिकता की जांच करने का सीमित अधिकार है, लेकिन यह नागरिकता का निर्धारण नहीं है। इस प्रक्रिया के तहत 65 लाख नाम हटाए गए हैं, जो पिछले चार दशकों में शहरीकरण और प्रवासन के कारण हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि मतदाता सूची की सटीकता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है। इसके साथ ही, चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके मामलों को चार हफ्ते में सक्षम अधिकारियों को भेजा जाए ताकि नागरिकता का निर्धारण किया जा सके।
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यह निर्णय बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित 13 राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया की वैधता को स्पष्ट करता है।
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