सुप्रीम कोर्ट का फैसला: वोटर लिस्ट पुनरीक्षण प्रक्रिया पर उठे सवाल
वोटर लिस्ट पुनरीक्षण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, SIR पर टिकी निगाहें

Image: Globalherald
सुप्रीम कोर्ट आज चुनाव आयोग की 'मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाएगा। याचिकाकर्ता इस प्रक्रिया को संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के खिलाफ मानते हैं, जिससे गरीब और प्रवासी मतदाताओं के अधिकारों पर खतरा है।
- 01सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 29 जनवरी को सुनवाई पूरी की थी और अब फैसला सुरक्षित रखा है।
- 02याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि SIR प्रक्रिया गरीब और प्रवासी लोगों के वोटिंग अधिकार को प्रभावित कर सकती है।
- 03चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया वोटर लिस्ट को साफ और शुद्ध बनाने के लिए आवश्यक है।
- 04इस प्रक्रिया में 2002 या 2003 की वोटर लिस्ट में नाम न होने वाले मतदाताओं को पारिवारिक संबंध साबित करने की आवश्यकता है।
- 05सुप्रीम कोर्ट ने पहले पहचान के लिए 11 दस्तावेज तय किए थे, लेकिन बाद में पहचान पत्र के रूप में आधार को भी शामिल करने का निर्देश दिया।
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सुप्रीम कोर्ट आज चुनाव आयोग की 'मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया पर अपना फैसला सुनाएगा। इस मामले में याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें कहा गया है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के नियमों का उल्लंघन करती है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग की शर्तें गरीब, मजदूर और प्रवासी मतदाताओं के लिए वोटिंग के अधिकार को सीमित कर सकती हैं। खासकर, जिन मतदाताओं का नाम 2002 या 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है, उन्हें पारिवारिक संबंध साबित करने की आवश्यकता है। चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को आवश्यक बताया है, जिसका उद्देश्य फर्जी मतदाताओं को हटाना है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले कुछ अंतरिम निर्देश भी दिए थे, जिसमें पहचान पत्र के रूप में आधार को शामिल करने का निर्देश दिया गया। अब देखना होगा कि सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में क्या निर्णय लेता है।
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यह फैसला गरीब और प्रवासी मतदाताओं के वोटिंग अधिकारों पर सीधा असर डाल सकता है।
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