सरकारी बैंकों में हिस्सेदारी में कमी की योजना: पूंजी जुटाने के लिए क्यूआईपी और बॉंड का उपयोग
सरकारी बैंकों में कम होगी सरकार की हिस्सेदारी! पूंजी जुटाने के लिए QIP और बॉन्ड का सहारा
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भारत के सरकारी बैंकों, जैसे बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक, पूंजी जुटाने के लिए इक्विटी और बॉंड का सहारा ले रहे हैं। यह कदम उन्हें ऋण हानि प्रावधान के लिए आवश्यक कॉमन इक्विटी टियर-1 (सीईटी1) पूंजी को मजबूत करने में मदद करेगा और सरकारी हिस्सेदारी को कम करेगा।
- 01सरकारी बैंकों को पूंजी जुटाने के लिए क्यूआईपी और बॉंड का सहारा लेना होगा।
- 02बैंक ऑफ इंडिया ने 7,500 करोड़ रुपये जुटाने के लिए बोर्ड से मंजूरी प्राप्त की।
- 03इंडियन बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक भी पूंजी जुटाने की योजना बना रहे हैं।
- 04ईसीएल ढांचे के लागू होने से बैंकों को अतिरिक्त प्रावधान करने की आवश्यकता होगी।
- 05सरकारी हिस्सेदारी को कम करने के लिए बैंकों को पूंजी जुटाना आवश्यक है।
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भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंक, जैसे बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक, पूंजी जुटाने के लिए इक्विटी और बॉंड का सहारा ले रहे हैं। इससे उन्हें ऋण हानि प्रावधान के लिए आवश्यक कॉमन इक्विटी टियर-1 (सीईटी1) पूंजी को मजबूत करने में मदद मिलेगी। बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2027 के दौरान 7,500 करोड़ रुपये जुटाने के लिए बोर्ड से मंजूरी प्राप्त की है, जिसमें 2,500 करोड़ रुपये अतिरिक्त टियर-1 बॉंड और 5,000 करोड़ रुपये टियर-2 बॉंड के माध्यम से जुटाए जाएंगे। इंडियन बैंक ने भी 5,000 करोड़ रुपये क्यूआईपी के जरिए जुटाने की योजना बनाई है। ईसीएल (एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस) ढांचे को अप्रैल 2027 से लागू किया जाएगा, जिसके तहत बैंकों को अपेक्षित नुकसान के आधार पर प्रावधान करना होगा। इससे पहले, बैंकों को वास्तविक नुकसान के आधार पर प्रावधान करना होता था। इस नए ढांचे के लागू होने के बाद बैंकों को अतिरिक्त प्रावधान करने की आवश्यकता होगी।
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सरकारी हिस्सेदारी में कमी से बैंकों की स्वतंत्रता बढ़ेगी और उन्हें अधिक पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी, जिससे वे ऋण देने की क्षमता में सुधार कर सकेंगे।
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