बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई से विदेशी कंपनियों की बढ़ती रुचि
100% FDI के बाद बीमा सेक्टर में विदेशी कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ी, जनरल इंश्योरेंस पर ज्यादा फोकस
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गैर-जीवन बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति के बाद, विदेशी कंपनियों की रुचि बढ़ी है। अमेरिकी-स्विस कंपनी चब और दक्षिण अफ्रीका की ओल्ड म्युचुअल जैसी कंपनियां भारत में प्रवेश करने की संभावनाएं तलाश रही हैं। नियामकीय बदलाव और बेहतर बाजार स्थितियों ने इस रुचि को बढ़ावा दिया है।
- 01गैर-जीवन बीमा में 100% एफडीआई की अनुमति से विदेशी कंपनियों की रुचि बढ़ी है।
- 02अमेरिकी-स्विस कंपनी चब और ओल्ड म्युचुअल भारत में निवेश की संभावनाएं तलाश रही हैं।
- 03नियामकीय बदलाव और बेहतर बाजार स्थितियों ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया है।
- 04जीवन बीमा के मुकाबले गैर-जीवन बीमा में अधिक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं।
- 05आईआरडीएआई ने किवी जनरल इंश्योरेंस को मंजूरी दी, जो विदेशी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है।
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गैर-जीवन बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति के बाद विदेशी बीमा कंपनियों की रुचि में वृद्धि हुई है। कई वैश्विक कंपनियाँ, जैसे कि अमेरिकी-स्विस कंपनी चब और दक्षिण अफ्रीका की ओल्ड म्युचुअल, भारत के बीमा बाजार में प्रवेश की संभावनाएं तलाश रही हैं। ये कंपनियाँ पहले भी भारतीय बीमा उद्यमों में निवेश कर चुकी हैं लेकिन कुछ वर्षों में उन्होंने अपना निवेश समेट लिया था। हाल ही में आईआरडीएआई ने वेस्टब्रिज कैपिटल के निवेश वाली किवी जनरल इंश्योरेंस को मंजूरी दी है, जिससे विदेशी कंपनियों की रुचि और बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बीमा बाजार में विदेशी कंपनियों की दिलचस्पी का मुख्य कारण नियामकीय बदलाव और बेहतर बाजार स्थितियां हैं। हालांकि, जीवन बीमा की तुलना में गैर-जीवन बीमा में अधिक गतिविधियां हो रही हैं, क्योंकि जीवन बीमा में वितरण चैनल अधिक जटिल हैं।
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इस बदलाव से भारतीय बीमा बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं और विकल्प मिलेंगे।
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