दिल्ली हाई कोर्ट ने जेपी नड्डा के पुतला जलाने के मामले में आरोपितों को राहत देने से किया इनकार
जेपी नड्डा के घर के बाहर पुतला जलाने वालों को राहत नहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा- यह प्रदर्शन नहीं हिंसा

Image: Jagran
दिल्ली हाई कोर्ट ने भाजपा नेता जेपी नड्डा के सरकारी आवास के बाहर पुतला जलाने के आरोपितों की याचिका खारिज कर दी, इसे हिंसा मानते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। आरोपितों पर 25,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
- 01दिल्ली हाई कोर्ट ने पुतला जलाने की घटना को विघटनकारी गतिविधि करार दिया।
- 02कोर्ट ने कहा कि आरोपितों का कार्य जानबूझकर किया गया था, न कि लापरवाही से।
- 03आरोपितों पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया, जो भारत के वीर ट्रस्ट में जमा होगा।
- 04सीसीटीवी फुटेज ने आरोपितों की खतरनाक मंशा को स्पष्ट किया।
- 05कोर्ट ने कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा के सरकारी आवास के बाहर पुतला जलाने के आरोपितों की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता। आरोपितों ने सुरक्षा कर्मियों के विरोध के बावजूद जलते हुए पुतले को सुरक्षा कक्ष की छत पर फेंका, जिससे गंभीर चोट लगने की संभावना थी। कोर्ट ने इसे जानबूझकर किया गया कार्य मानते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 436 और 285 के तहत कार्रवाई की। आरोपितों पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसे एक सप्ताह के भीतर भारत के वीर ट्रस्ट में जमा करने का निर्देश दिया गया। सुनवाई के दौरान सीसीटीवी फुटेज पेश की गई, जिसने आरोपितों की खतरनाक मंशा को स्पष्ट किया। कोर्ट ने कहा कि समाज का एक वर्ग विरोध के नाम पर विघटनकारी गतिविधियों में लिप्त हो रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
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इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि हिंसक प्रदर्शन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जो समाज में शांति बनाए रखने में सहायक है।
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