1258 ईस्वी में निर्मित तारे के आकार का चेन्नाकेशव मंदिर, कर्नाटक की अद्भुत वास्तुकला का उदाहरण
1258 ईस्वी में बना तारे के आकार का नारायण को समर्पित विशेष मंदिर, देवालय में तीन-तीन गर्भगृह से होती है पूजा
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कर्नाटक के मैसूर में स्थित चेन्नाकेशव मंदिर, जो 1258 ईस्वी में बना, तारे के आकार में है और इसमें तीन गर्भगृह हैं। इसे 2023 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला है। इस मंदिर की अद्भुत नक्काशी और वास्तुकला इसे देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती है।
- 01चेन्नाकेशव मंदिर का निर्माण होयसला राजा नरसिम्हा तृतीय के सेनापति सोमनाथ दंडनायक ने किया था।
- 02मंदिर में भगवान केशव, वेणुगोपाल और जनार्दन के तीन अलग-अलग गर्भगृह हैं।
- 03मंदिर की दीवारों पर हजारों मूर्तियां और नक्काशी की गई है, जो होयसला शैली की विशेषता है।
- 04यह मंदिर बैकुंठ एकादशी और जन्माष्टमी जैसे त्योहारों पर विशेष आयोजनों का स्थल है।
- 05सोमनाथपुर मंदिर मैसूर की सांस्कृतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसके पास कई दर्शनीय स्थल हैं।
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कर्नाटक राज्य के मैसूर में स्थित चेन्नाकेशव मंदिर, जिसे सोमनाथपुर मंदिर भी कहा जाता है, का निर्माण 1258 ईस्वी में होयसला राजा नरसिम्हा तृतीय के सेनापति सोमनाथ दंडनायक द्वारा कराया गया था। यह मंदिर तारे के आकार में बना है और इसमें तीन गर्भगृह हैं, जहां भगवान केशव, वेणुगोपाल और जनार्दन विराजमान हैं। इस मंदिर की वास्तुकला और नक्काशी अद्भुत है, जिसमें देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं, और दैनिक जीवन के दृश्यों की बारीक चित्रण किया गया है। 2023 में इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला है। मंदिर के आसपास के क्षेत्र में बैकुंठ एकादशी और जन्माष्टमी जैसे पर्व पर विशेष आयोजन होते हैं। यह मंदिर मैसूर की सांस्कृतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और इसके पास भव्य मैसूर पैलेस, चामुंडेश्वरी मंदिर और सेंट फिलोमेना चर्च जैसे दर्शनीय स्थल हैं।
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यह मंदिर स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होता है।
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