AI की वजह से वैज्ञानिक शोध पत्रों में फर्जी रेफरेंस की बढ़ती समस्या
AI ने वैज्ञानिकों को ही बना दिया मूर्ख! रिसर्च पेपर्स में डाल दीं 1.5 लाख ऐसी बातें जो दुनिया में हैं ही नहीं
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एक नई स्टडी के अनुसार, 2025 तक लगभग 1.46 लाख फर्जी रेफरेंस वैज्ञानिक शोध पत्रों में शामिल हो गए हैं, जो AI टूल्स द्वारा बनाए गए हैं। यह समस्या प्रतिष्ठित जर्नल्स में भी देखी गई है, जिससे शोध की विश्वसनीयता पर खतरा मंडरा रहा है।
- 012025 तक SSRN पर 2% और arXiv पर 0.4% फर्जी साइटेशन की दर का अनुमान है।
- 02शोधकर्ताओं ने 2020 से 2025 के बीच 25 लाख रिसर्च पेपर्स का विश्लेषण किया।
- 0378.8% फर्जी रेफरेंस arXiv की मॉडरेशन प्रक्रिया से गुजर गए।
- 042024 के मध्य से AI टूल्स का उपयोग तेजी से बढ़ा, जिससे फर्जी रेफरेंस में वृद्धि हुई।
- 05प्रकाशकों को स्वचालित रेफरेंस सत्यापन प्रणाली लागू करने की सलाह दी गई है।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने वैज्ञानिक शोध पत्रों में फर्जी रेफरेंस की समस्या को बढ़ा दिया है। एक अध्ययन के अनुसार, 2025 तक लगभग 1.46 लाख फर्जी रेफरेंस AI टूल्स द्वारा बनाए गए हैं, जो कि प्रतिष्ठित जर्नल्स में भी प्रकाशित हो चुके हैं। यह अध्ययन कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया, जिसमें 2020 से 2025 के बीच प्रकाशित 25 लाख रिसर्च पेपर्स का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि 2022 के बाद फर्जी रेफरेंस की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, जो AI आधारित भाषा मॉडल्स के बढ़ते उपयोग से संबंधित है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि फर्जी रेफरेंस का सबसे अधिक प्रभाव नए शोधकर्ताओं पर पड़ा है। शोधकर्ताओं ने प्रकाशकों से आग्रह किया है कि वे किसी भी शोध पत्र को स्वीकार करने से पहले स्वचालित रेफरेंस सत्यापन प्रणाली लागू करें।
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फर्जी रेफरेंस की समस्या से वैज्ञानिक शोध की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है, जिससे चिकित्सा गाइडलाइंस और क्लीनिकल रिसर्च पर खतरा मंडरा रहा है।
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