जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वंदे मातरम को अनिवार्य करने के खिलाफ कानूनी लड़ाई का ऐलान किया
वंदे मातरम पर अब आर या पार, जमीयत ने दी चेतावनी; कहा- सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला तो जाएंगे कोर्ट

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जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वंदे मातरम को अनिवार्य करने के केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ कानूनी लड़ाई छेड़ने की घोषणा की है। जमीयत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया और सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग की। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
- 01जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वंदे मातरम को अनिवार्य करने के निर्णय को धार्मिक विश्वास के खिलाफ बताया।
- 02अधिवेशन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई, जिसमें विधानसभा चुनाव और जनणना शामिल हैं।
- 03जमीयत ने केंद्र सरकार के निर्णय को भारतीय संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया।
- 04मौलाना अरशद मदनी ने मस्जिदों और मदरसों को अवैध बताने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की।
- 05सरकार से वंदे मातरम के अनिवार्य करने के निर्णय को तुरंत वापस लेने की मांग की गई।
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जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वंदे मातरम को अनिवार्य करने के केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ कानूनी लड़ाई छेड़ने का ऐलान किया है। जमीयत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि यह निर्णय उनके धार्मिक विश्वास के खिलाफ है और इसे अनिवार्य बनाकर उनकी धार्मिक स्वतंत्रता को छीनने का प्रयास किया जा रहा है। अधिवेशन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई, जिसमें विधानसभा चुनाव और जनणना जैसे विषय शामिल थे। जमीयत ने केंद्र सरकार के निर्णय को भारतीय संविधान की मूल भावना, धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। मदनी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना निर्णय नहीं बदला, तो वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके अलावा, उन्होंने मस्जिदों और मदरसों को अवैध बताने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की और मदरसा बोर्ड गठित करने का प्रस्ताव रखा।
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इस निर्णय का प्रभाव मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर पड़ सकता है।
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