तमिलनाडु में विजय सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, राष्ट्रपति शासन की मांग
विजय सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL, राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग

Image: Aaj Tak
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि विधानसभा चुनाव के बाद विधायकों की खरीद-फरोख्त हुई। याचिका में CBI जांच और राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की गई है, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
- 01याचिका मदुरई निवासी के.के. रमेश द्वारा दाखिल की गई है।
- 02याचिका में आरोप लगाया गया है कि TVK पार्टी ने बहुमत जुटाने के लिए हॉर्स ट्रेडिंग का सहारा लिया।
- 03याचिकाकर्ता ने CBI और केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया है।
- 04याचिका में कहा गया है कि विश्वास मत के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन हुआ।
- 05याचिकाकर्ता ने जांच पूरी होने तक राष्ट्रपति शासन लगाने की अपील की है।
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तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री विजय की सरकार के खिलाफ नया विवाद खड़ा हो गया है। 13 मई को विधानसभा में हुए विश्वास प्रस्ताव के दौरान विधायकों की खरीद-फरोख्त और लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन के आरोपों के चलते सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका में मदुरई निवासी के.के. रमेश ने आरोप लगाया है कि TVK पार्टी ने बहुमत पाने के लिए अनैतिक तरीके अपनाए। याचिका में CBI जांच कराने और जांच पूरी होने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा कि विश्वास मत के दौरान लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लंघन हुआ और विधायकों पर दबाव डाला गया। उन्होंने अदालत से स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की अपील की है। यदि हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ होगा। इस मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
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यदि राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है, तो यह राज्य की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करेगा और सरकार के कार्यों की जांच में मदद करेगा।
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