लिथुआनिया में युवा सेना में भर्ती का कारण: देशभक्ति या आर्थिक सुरक्षा?
देशभक्ति नहीं, कुछ और... इस देश के युवा इसलिए हो रहे फौज में भर्ती?
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लिथुआनिया में युवा सेना में भर्ती होने का मुख्य कारण देशभक्ति नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की अनिश्चितता है। सरकार की सख्त ड्राफ्ट पॉलिसी के चलते, युवा मजबूरन सेना का रुख कर रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।
- 01लिथुआनिया में युवा सेना में भर्ती का कारण देशभक्ति नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा है।
- 02सरकार ने अनिवार्य सैन्य सेवा की ड्राफ्ट पॉलिसी को सख्त किया है।
- 03युवाओं के लिए सेना एक सुरक्षित करियर विकल्प बन गया है।
- 04सैन्य सेवा के दौरान युवा 8,835 यूरो (लगभग 8 लाख रुपये) तक कमा सकते हैं।
- 05यूक्रेन पर हमले के बाद से लिथुआनिया अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में जुटा है।
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लिथुआनिया, जो रूस और बेलारूस के साथ सीमा साझा करता है, में युवा सेना में भर्ती होने का कारण मुख्यतः आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की अनिश्चितता है। हाल ही में सरकार ने अनिवार्य सैन्य सेवा की ड्राफ्ट पॉलिसी को सख्त कर दिया है, जिसके तहत 18 से 22 साल के सभी युवा जो स्वास्थ्य जांच में फिट पाए जाते हैं, उन्हें सेना में सेवा देना अनिवार्य है। इस साल ड्राफ्ट में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या 3,500 से बढ़ाकर 5,000 कर दी गई है। कई युवा यह मानते हैं कि सेना में भर्ती होना उनकी शिक्षा और करियर के लिए एक बाधा बन सकता है। हालांकि, कुछ छात्रों ने स्वेच्छा से सेना में शामिल होने का निर्णय लिया है, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जिम्मेदारी से मुक्त होना है। लिथुआनिया के रक्षा मंत्रालय का मानना है कि युवा देश की रक्षा के लिए उत्साहित हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि आर्थिक सुरक्षा के कारण युवा सेना में शामिल हो रहे हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद से, सरकार ने सेना के वेतन और भत्तों में वृद्धि की है, जिससे युवा आकर्षित हो रहे हैं।
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युवाओं के लिए सेना में भर्ती होने से आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन यह उनकी शिक्षा और करियर पर भी प्रभाव डाल सकता है।
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