इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को दी नसीहत, बालिग जोड़ों का पीछा करने से रोकने का आदेश
बालिग जोड़ों का पीछा करने के बजाय, अपराधों की जांच करें- इलाहाबाद हाईकोर्ट की यूपी पुलिस को नसीहत
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस सहमति से शादी करने वाले बालिग जोड़ों का पीछा करने में व्यस्त है, जबकि उन्हें अपराधों की जांच करनी चाहिए। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे इस प्रकार के मामलों में दखल न दें और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करें।
- 01इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया।
- 02पुलिस बालिग जोड़ों का पीछा करने में व्यस्त है, जबकि उन्हें अपराधों की जांच करनी चाहिए।
- 03कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करें।
- 04पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने के मामलों की संख्या बढ़ रही है।
- 05कोर्ट ने लड़की के पिता द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द किया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है, जिसमें कहा गया है कि पुलिस सहमति से शादी करने वाले बालिग जोड़ों का पीछा करने में व्यस्त है, जबकि उनकी प्राथमिकता अपराधों की जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक क्रिमिनल रिट याचिका की सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक युवा दंपति ने पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अपनी ऊर्जा ऐसे मामलों में बर्बाद कर रही है, जो वास्तव में कोर्ट में लाने लायक नहीं हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर नागरिक को अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है और किसी को भी बालिगों की इच्छाओं पर हावी होने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही, कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) को निर्देश दिया कि वे भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाइयों को रोकें।
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इस फैसले से यूपी में बालिग जोड़ों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मान्यता मिलेगी और पुलिस की कार्रवाई में सुधार होगा।
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