भारत पर होर्मुज संकट का आर्थिक दबाव: तेल की कीमतें और राजकोषीय चुनौतियाँ
Editorial: होर्मुज संकट और तेल की कीमतों से भारत के सामने राजकोषीय दबाव
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिससे भारत में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। सरकार को राजस्व में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे राजकोषीय स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।
- 01ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है।
- 02भारत में तेल की कीमतों में वृद्धि हो रही है, जिससे राजकोषीय दबाव बढ़ रहा है।
- 03सरकार को उत्पाद शुल्क में कटौती के कारण 1.5 लाख करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा।
- 04राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3% तक सीमित रखने का लक्ष्य अब कठिन हो गया है।
- 05यदि तनाव जारी रहता है, तो यह आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ईरान के युद्ध समाप्त करने के प्रस्ताव को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो गई है। पिछले सप्ताह बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है, जिससे भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत की सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों ने वाणिज्यिक तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) सिलिंडरों की कीमतों में वृद्धि की है, जबकि पेट्रोल और डीजल के खुदरा मूल्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती की है, लेकिन इससे 1.5 लाख करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा। इस स्थिति के कारण राजकोषीय दबाव बढ़ रहा है, जिससे सरकार की आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने की क्षमता सीमित हो गई है। केंद्रीय सचिव वी. वुअलनाम ने बताया कि राजकोषीय स्थिति चुनौतीपूर्ण है और यदि तनाव जारी रहा, तो यह आर्थिक स्थिरता को भी प्रभावित कर सकता है।
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तेल की कीमतों में वृद्धि से घरेलू उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा, जिससे महंगाई भी प्रभावित हो सकती है।
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