भारत गहरे समुद्र में तेल और गैस खोजने के लिए 'समुद्र मंथन' कार्यक्रम शुरू करेगा
ऊर्जा संकट ने खोली सरकार की आंख, अब 'समुद्र मंथन' के जरिए गहरे पानी में तेल व गैस खोजेगा भारत
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भारत ने ऊर्जा संकट के बीच घरेलू ऊर्जा अन्वेषण को बढ़ावा देने के लिए 'समुद्र मंथन' कार्यक्रम की घोषणा की है। यह कार्यक्रम गहरे और अति गहरे समुद्री क्षेत्रों में भूकंपीय डेटा एकत्रित करने पर केंद्रित होगा, जिससे विदेशी निवेश को आकर्षित करने और ऊर्जा आयात पर निर्भरता को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
- 01भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता बढ़ी है, खासकर पश्चिम एशिया संकट के कारण।
- 02सरकार ने गहरे समुद्री क्षेत्रों में भूकंपीय डेटा एकत्र करने के लिए 'समुद्र मंथन' कार्यक्रम शुरू किया।
- 03डीजीएच इस प्रक्रिया का नेतृत्व करेगा, लेकिन खर्च की राशि का खुलासा नहीं किया गया है।
- 04सरकार ने लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर के अपतटीय क्षेत्रों को अन्वेषण के लिए खोला है।
- 05ओपन एक्रेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी 11) के तहत 21 नए अन्वेषण ब्लॉकों की पेशकश की गई है।
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पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति में बाधा उत्पन्न की है, जिससे ईंधन के आयात पर निर्भरता की समस्या और बढ़ गई है। इसे ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने 'समुद्र मंथन' कार्यक्रम की घोषणा की है, जो गहरे और अति गहरे समुद्री क्षेत्रों में भूकंपीय डेटा एकत्रित करने पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम का नेतृत्व हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) करेगा। हालांकि, इस प्रक्रिया में खर्च होने वाली राशि का अभी खुलासा नहीं किया गया है। सरकार का उद्देश्य इन अनछुए अपतटीय क्षेत्रों में डेटा संग्रह को प्राथमिकता देकर विदेशी निवेश को आकर्षित करना है। भारत ने लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर के अपतटीय क्षेत्रों को अन्वेषण के लिए खोला है, जो कि नीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। इसके साथ ही, ओपन एक्रेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी 11) के तहत 21 नए तेल और गैस अन्वेषण ब्लॉकों की पेशकश की गई है।
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इस कार्यक्रम से भारत की ऊर्जा सुरक्षा में सुधार हो सकता है और विदेशी निवेश को आकर्षित किया जा सकता है।
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