इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जाली दस्तावेजों पर मिली सरकारी नौकरी को अमान्य ठहराया
High Court : जाली दस्तावेजों के आधार पर मिली नियुक्ति शुरू से ही अमान्य
Amar Ujala
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जाली दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करना कानून के अनुसार शून्य है। यह फैसला एक सहायक शिक्षक की याचिका खारिज करते हुए दिया गया, जिसने फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल की थी। कोर्ट ने मामले की गहन जांच का निर्देश भी दिया।
- 01जाली दस्तावेजों पर मिली सरकारी नौकरी अमान्य मानी जाएगी।
- 02इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक सहायक शिक्षक की याचिका खारिज की।
- 03नियुक्ति के दौरान फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया था।
- 04कोर्ट ने अधिकारियों को मामले की गहराई से जांच करने का निर्देश दिया।
- 05धोखाधड़ी के आधार पर प्राप्त लाभ वैध नहीं होंगे।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति जालसाजी या फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से सरकारी नौकरी प्राप्त करता है, तो उसकी नियुक्ति कानून की दृष्टि में प्रारंभ से ही शून्य मानी जाएगी। यह निर्णय न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने शामली जिले के सहायक शिक्षक विनीत कुमार की याचिका को खारिज करते हुए दिया। विनीत कुमार को 2016 में एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन उनकी शैक्षिक दस्तावेज जाली पाए गए। कोर्ट ने कहा कि जब नियुक्ति की बुनियाद ही धोखाधड़ी पर आधारित हो, तो उसे किसी भी स्तर पर राहत नहीं दी जा सकती। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अधिकारियों को इस प्रकरण की गहराई से जांच करने का निर्देश भी दिया।
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इस फैसले से सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और जालसाजी के मामलों में सख्ती से निपटा जाएगा।
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