देहरादून रेलवे स्टेशन पर ब्रिटिश राज की छाप बरकरार, औपनिवेशिक प्रतीकों के हटाने की प्रक्रिया जारी
देहरादून रेलवे स्टेशन पर 126 साल बाद भी नहीं मिटे गुलामी के निशान, आज भी कायम है ब्रिटिश राज की छाप
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देहरादून रेलवे स्टेशन, जो 126 साल पुराना है, आज भी ब्रिटिश राज की छाप लिए हुए है। रेलवे बोर्ड ने औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन स्टेशन की संरचना और कार्यसंस्कृति में अभी भी अंग्रेजों के समय की झलक देखी जा सकती है।
- 01देहरादून रेलवे स्टेशन का निर्माण 1899 में हुआ था।
- 02ब्रिटिश राज की कई निशानियां आज भी स्टेशन पर मौजूद हैं।
- 03रेलवे बोर्ड ने औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की है।
- 04स्टेशन का पुनर्विकास 2019-20 में हुआ, लेकिन ऐतिहासिक चरित्र में बदलाव नहीं आया।
- 05ब्रिटिशकालीन भवनों और कार्यसंस्कृति का प्रभाव आज भी देखा जा सकता है।
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देहरादून रेलवे स्टेशन, जो 126 साल पुराना है, आज भी ब्रिटिश राज की छाप लिए हुए है। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनों को औपनिवेशिक अवशेषों को चिह्नित कर हटाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन देहरादून स्टेशन की संरचना और कार्यसंस्कृति में अभी भी अंग्रेजों के समय की झलक देखी जा सकती है। स्टेशन का निर्माण 1899 में हुआ था और यहाँ आज भी कई ब्रिटिशकालीन भवन, जैसे लाल ईंटों से बने शेड और मेहराबदार गेट, मौजूद हैं। रेलवे के पुराने कोचिंग शेड भी अभी तक देखे जा सकते हैं। हालाँकि, रेलवे बोर्ड ने 'गार्ड' जैसे पदनामों को बदलने और औपनिवेशिक परंपराओं को खत्म करने की योजना बनाई है, लेकिन स्टेशन पर अभी भी 'साहब संस्कृति' की झलक दिखाई देती है। 2019-20 में स्टेशन का पुनर्विकास किया गया था, जिसमें नए प्लेटफार्म और आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गईं, लेकिन इसका मूल ऐतिहासिक चरित्र पूरी तरह नहीं बदला।
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यदि रेलवे बोर्ड औपनिवेशिक प्रतीकों को सफलतापूर्वक हटाता है, तो यह स्थानीय लोगों की मानसिकता और रेलवे की कार्यसंस्कृति में बदलाव ला सकता है।
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