इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले से खुद को अलग किया
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले की सुनवाई से अलग हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज, अब आगे क्या होगा?
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। मामले को अब चीफ जस्टिस अरुण भंसाली के पास भेजा गया है, जहां दूसरी बेंच का गठन किया जाएगा।
- 01जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने मामले से खुद को अलग किया।
- 02अवमानना याचिका में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर जमानत शर्तों के उल्लंघन का आरोप है।
- 03मामला अब चीफ जस्टिस को सौंपा गया है।
- 04आशुतोष ब्रह्मचारी ने पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी।
- 05इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 मार्च 2026 को अग्रिम जमानत दी थी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह याचिका आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि दोनों ने अंतरिम जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने यह मामला चीफ जस्टिस अरुण भंसाली के पास भेजा है, जहां दूसरी बेंच का गठन किया जाएगा। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य पर नाबालिगों के यौन उत्पीड़न के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 मार्च 2026 को दोनों को अग्रिम जमानत दी थी, जिसमें कहा गया था कि सभी पक्षों को मीडिया में कोई भी साक्षात्कार देने से रोका गया है।
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इस मामले का असर स्थानीय समुदाय पर पड़ सकता है, विशेषकर उन लोगों पर जो शंकराचार्य और उनके शिष्य के अनुयायी हैं।
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