अल नीनो का प्रभाव: भारत के मानसून पर चिंताएं कम हुईं
इस साल अपने चरम पर पहुंच सकता है अल नीनो, भारत के मानसून को लेकर क्यों कम हो गई चिंताएं?

Image: Jagran
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, अल नीनो इवेंट्स अक्सर मानसून से पहले कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे भारत के 2027 के मानसून पर चिंताएं कम हो गई हैं। 1951 के बाद के आंकड़ों से पता चलता है कि ये इवेंट्स साल के अंत में अपने चरम पर पहुंचते हैं और फिर कमजोर होते हैं।
- 01अल नीनो के प्रभाव का ऐतिहासिक पैटर्न दर्शाता है कि ये इवेंट्स मानसून से पहले कमजोर पड़ जाते हैं।
- 021997-98 और 2015-16 के अल नीनो इवेंट्स ने भी इसी पैटर्न का पालन किया।
- 03भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अधिकारियों का कहना है कि 2027 में अल नीनो की तीव्रता कमजोर होने की संभावना है।
- 04पश्चिमी प्रशांत महासागर में पानी के ठंडा होने के संकेत मिल रहे हैं, जो बदलाव की ओर इशारा करते हैं।
- 05हालांकि, लंबे समय के लिए किए गए पूर्वानुमानों की सटीकता अक्सर कम होती है।
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भारत में मौसम वैज्ञानिकों ने बताया है कि बड़े अल नीनो इवेंट्स अक्सर मानसून से पहले कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे 2027 के मानसून पर चिंताएं कम हुई हैं। 1951 के बाद के आंकड़ों के अनुसार, अल नीनो इवेंट्स साल के अंत में अपनी अधिकतम तीव्रता पर पहुंचते हैं और फिर मानसून के मौसम से पहले कमजोर होते हैं। उदाहरण के लिए, 1997-98 और 2015-16 के अल नीनो इवेंट्स ने इसी पैटर्न का पालन किया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अधिकारियों के अनुसार, पश्चिमी प्रशांत महासागर में पानी के ठंडा होने के संकेत मिल रहे हैं, जो अगले साल अल नीनो की स्थिति में बदलाव की ओर इशारा कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि लंबे समय के लिए किए गए पूर्वानुमानों की सटीकता कम होती है। इस प्रकार, 2027 के मानसून पर अल नीनो का प्रभाव अनिश्चित बना हुआ है, और इसके कमजोर होने या ला नीना में बदलने की संभावना को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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यदि अल नीनो कमजोर होता है, तो इससे भारत के 2027 के मानसून पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे किसानों और कृषि पर राहत मिल सकती है।
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