कर्नाटक के नफरती बयानों पर विधेयक को केंद्र ने किया खारिज
नफरती बयानों पर कर्नाटक के विधेयक को केंद्र ने किया खारिज
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कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तावित घृणास्पद बयानों पर कार्रवाई के लिए विधेयक को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा कानून इस मुद्दे के लिए पर्याप्त हैं और नए कानून की आवश्यकता नहीं है।
- 01कर्नाटक सरकार ने 'कर्नाटक घृणास्पद बयान और घृणास्पद अपराध (रोकथाम) विधेयक 2025' तैयार किया था।
- 02यह विधेयक कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा अस्वीकृत होने के बाद पेश किया गया।
- 03गृह मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा भारतीय न्याय संहिता 2023 में पहले से ही आवश्यक प्रविधान मौजूद हैं।
- 04कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने विधेयक को 19 दिसंबर, 2025 को विधानमंडल में पारित कराया।
- 05केंद्र ने कहा कि अलग-अलग राज्यों द्वारा समान अपराधों पर अलग कानून बनाने से अराजकता उत्पन्न होगी।
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कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तावित घृणास्पद बयानों पर कार्रवाई के लिए विधेयक को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने इसे 'गैरजरूरी' करार दिया है, यह कहते हुए कि मौजूदा कानूनी प्रविधान देश में नफरती बयानबाजी से निपटने के लिए पर्याप्त हैं। कर्नाटक सरकार ने 'कर्नाटक घृणास्पद बयान और घृणास्पद अपराध (रोकथाम) विधेयक 2025' का मसौदा तैयार किया था, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की स्वीकृति के लिए गृह मंत्रालय को भेजा गया था। यह कदम तब उठाया गया जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने विधेयक को स्वीकृति देने से इनकार कर दिया था। कांग्रेस सरकार ने इस विधेयक को 19 दिसंबर, 2025 को बेलगावी में विधानमंडल के दोनों सदनों से पारित कराया था। गृह मंत्रालय ने कहा कि विधेयक के प्रविधान पहले से ही भारतीय न्याय संहिता 2023 में शामिल हैं, और अलग कानून बनाने से केवल अराजकता फैलेगी।
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कर्नाटक में नफरती बयानों पर नियंत्रण के लिए नए कानून की अनुपस्थिति से मौजूदा कानूनी ढांचे का उपयोग जारी रहेगा।
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