भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.43 पर पहुंचा, आर्थिक संकट की चेतावनी
इतिहास के सबसे बुरे दौर में भारतीय करेंसी! डॉलर के मुकाबले 95.43 पर पहुंची कीमत, कब थमेगी यह ढलान?
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भारतीय रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले 95.43 रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है। ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो रुपया और कमजोर हो सकता है।
- 01भारतीय रुपया 95.43 रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
- 02कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार गईं।
- 03विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 21 अरब डॉलर निकाले।
- 04भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को संभालने के लिए डॉलर बेचे।
- 05विशेषज्ञों का अनुमान है कि रुपये की कीमत 97.00 से 97.50 रुपये तक जा सकती है।
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भारतीय रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले 95.43 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया, जो कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष है, जिसने कच्चे तेल की कीमतों को 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है। इससे भारत का तेल आयात खर्च 70-80% तक बढ़ गया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भी इस संकट के चलते भारतीय बाजार से करीब 21 अरब डॉलर निकाले हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को संभालने के लिए बाजार में डॉलर बेचा है, लेकिन इसके बावजूद रुपये की स्थिति कमजोर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो रुपये की कीमत 97.00 से 97.50 रुपये तक जा सकती है। आम आदमी के लिए इसका मतलब है कि आयातित सामान और ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं।
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यदि रुपये की गिरावट जारी रहती है, तो आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान और ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
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