उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की हलचल शुरू हो चुकी है. ऐसे में देश भर की नजर सबसे बड़े राज्य की ओर है. उत्तर प्रदेश चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में जीत की हैट्रिक लगाने के लिए आत्मविश्वास में दिख रही है. वहीं मुख्य विपक्षी अखिलेश यादव की अगुवाई में समाजवाद पार्टी 10 साल बाद सत्ता का वनवास खत्म करने के प्रयास में है. सत्ता वनवास खत्म करने के लिए अखिलेश यादव लगातार प्लानिंग में जुटे हैं, वहीं उनकी पार्टी के नेता ऊटपटांग बयानबाजी से बाज नहीं आ रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या समाजवादी पार्टी के ऊपर से अखिलेश यादव का कंट्रोल कमजोर पड़ गया है. अखिलेश की सख्त हिदायत के बाद भी बाज नहीं आ रहे समाजवादी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ना केवल पार्टी फोरम में बल्कि सार्वजनिक मंचों से भी पार्टी नेताओं को गलत बयानबाजी से बचने की लगातार हिदायत दे रहे हैं, लेकिन वह विफल साबित होती दिख रही है. एक हिंदी दैनिक के कार्यक्रम में अखिलेश यादव से पूछा गया कि क्या विपक्ष इस मुद्रा में आ गया है कि हम भावनात्मक मुद्दों को लेकर नहीं भटकेंगे. केवल उन्हीं मुद्दों पर फोकस करेंगे जो सीधे जनता को प्रभावित करते हैं. लेकिन अगर आप मुद्दों पर बने भी रहना चाहते हैं तो आपकी पार्टी के नेता क्यों ऐसी बातें कर देते हैं जिससे मुद्दों का भटकाव दिखता है. समय-समय पर आपकी पार्टी के नेता ऐसी बात कर देते हैं जिसपर विवाद हो जाता है. इस बार आपकी पार्टी के राजकुमारी भाटी ने ऐसी बात कह दी जिसपर हंगामा मचा हुआ है. क्या आपको नहीं लगता कि इस तरह का बयान आपको आपके लक्ष्य से भी भटकाते हैं. इसके जवाब में अखिलेश यादव ने कहा- ‘मैंने समय-समय पर कहा है और फिर से कह रहा हूं, कोई भी समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता और नेता ना तो सोशल मीडिया पर लिखे, ना तो अपनी व्यवहारिक बातचीत में ऐसी बात कहे या हजारों सालों में जो मुहावरे बने हैं, जो भी बुराइयों की बातें बनी हैं, एक भी ऐसी बात ना करे और ना ही याद दिलाए.’ अखिलेश यादव ने कहा कि कहावत हमने नहीं बनाई है. मैं अपने कार्यकर्ताओं से कहता हूं कोई भी उन कहावतों को नहीं उठाएगा. फिर हमारा समाज जाति और धर्म का है. इसमें तो हम सब जानते हैं कि किस तरह की कहावतें बनीं हैं. सपा अध्यक्ष ने कहा- ‘कोई भी ऐसी बात ना कहें, जिससे किसी को ठेस पहुंचे, कोई हमारे भाषा व्यवहार से क्रोधित हो, हमें धैर्य और अनुशासन के साथ इस लड़ाई को जीतना है.’ अखिलेश यादव खुद स्वीकार कर रहे हैं कि वह लगातार अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिदायत देते हैं. सवाल उठता है कि फिर समाजवादी नेता और कार्यकर्ता भावनात्मक बातें क्यों करने से बाज नहीं आते. बीजेपी लगातार पूरे उत्तर प्रदेश में यही नैरेटिव बनाती रही है कि सपा सत्ता में आई तो गुंडाराज आ जाएगा. सपा के सत्ता में आते ही उनके गुंडे समाज के बड़े हिस्से पर अत्याचार करना शुरू कर देते हैं. अब खुद अखिलेश यादव भी स्वीकार कर रहे हैं कि उनके बार-बार मना करने के बाद भी इस तरह के बयान कैसे सामने आ रहे हैं. जानकारी के लिए बता दूं कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने ब्राह्मणों के लिए जातिगत कॉमेंट किया था, जिसके बाद उनके खिलाफ नोएडा सेक्टर 24 थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है. सड़क पर नमाज जैसे मुद्दों पर बोलने से बच रहे अखिलेश अखिलेश यादव अपनी पार्टी की छवि सुधारने और मुसलमानों के फिक्रमंद की छाप मिटाने के लिए सड़क पर नमाज पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर बोलने से बच रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से पूरे यूपी में सड़क पर नमाज पढ़ने नहीं दिए जाने के फैसले पर भी सपा अध्यक्ष कुछ भी बोलने से बचते रहे. इस सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा- ‘सड़कों पर क्या होना चाहिए, क्या नहीं होना चाहिए इसके लिए कानून हैं. लेकिन पॉलिटिकल स्कोरिंग नहीं होनी चाहिए.’ इतना कहने के बाद अखिलेश ने ट्रैक चेंज कर बीजेपी को सबसे अधर्मी पार्टी बताने लगे. पिछले दिनों वकील अपने हाथों में रामचरित मानस लेकर अपनी बात कहने के लिए सड़कों पर उतरे थे. उनपर इन लोगों ने लाठियां चलवा दी. अगर ये कहते हैं कि सनातनी हैं तो वसुधैव कुटुंबकम ही असली सनातन होता है. हम सबको अपनाते हैं यह सनातन धर्म है. हम सबको अपनाते हैं, भेदभाव कौन कर रहा है. जब अखिलेश से दोबारा पूछा गया कि सड़क पर नमाज पढ़ने की इजाजत होनी चाहिए या नहीं. इसपर उन्होंने एक बार फिर से ट्रैक बदला और कहने लगे- ‘स्मार्ट सिटी तो बनी नहीं, स्मार्ट मीटर फेल हो चुके हैं.’ अखिलेश ने साफ तौर से कहा कि वो इस तरह की बातें इसलिए कह रहे हैं कि हम मुद्दों से भटक जाएं. कौन नमाज पढ़ रहा सड़क पर, अब तो कोई नहीं पढ़ रहा. अगर कोई पढ़ भी रहा है, जगह कम है तो क्या दिक्कत है. वो ये चाहते हैं कि हम उस बहस में उलझ जाएं. हम लोगों ने भी बीजेपी से सीखा है. हम उनकी बातों में नहीं उलझेंगे, हम उनसे पेट्रोल-डीजल और नीट पर सवाल पूछेंगे. कुल मिलाकर देखें तो अखिलेश यादव यूपी चुनाव से पहले ममता बनर्जी वाली गलती करने से बचते दिख रहे हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने हिंन्दुत्व के मुद्दे को जमकर हवा दी. ममता बनर्जी को कथित रूप से ‘ममता बानो’ के रूप में प्रचारित किया गया. इस वजह से पूरे चुनाव में हिंदू ध्रुवीकरण हावी हो गया और बीजेपी जहां 207 सीटों पर जीत दर्ज की तो ममता बनर्जी की टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई. पश्चिम बंगाल से सबक लेते हुए अखिलेश यादव भले ही कह रहे हैं कि वह अपनी रणनीति पहले नहीं खोलेंगे. अब तक वह इसे फॉलो करते हुए भी दिखे हैं. लेकिन उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता समय-समय पर ऐसी बयानबाजी या हरकत कर बैठते हैं जिससे बीजेपी को उनके खिलाफ नैरेटिव बनाने में सुविधाजनक हो जा रही है.