नेपाल-भारत संबंधों में बालेन शाह का नया मोड़: लिपुलेख विवाद
Nepal India: ओली की राह पर बालेन शाह? भारत और नेपाल के रिश्तों पर खेल रहे दांव, लिपुलेख पर नया मोर्चा
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की नई सरकार ने भारत की कैलाश मानसरोवर यात्रा पर ऐतराज जताया है, जिससे भारत-नेपाल संबंधों में फिर से तनाव बढ़ सकता है। लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्र पर विवादित दावे के चलते राजनीतिक संवेदनशीलता बढ़ रही है।
- 01बालेन शाह की सरकार ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति जताई है।
- 02लिपुलेख विवाद नेपाल की आंतरिक राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- 03भारत ने लिपुलेख को अपना हिस्सा बताया है, जबकि नेपाल इसका दावा करता है।
- 04बालेन शाह को पूर्व प्रधानमंत्री ओली की विरासत का सामना करना पड़ रहा है।
- 05नेपाल की घरेलू राजनीति में भारत के प्रति नरमी को कमजोरी माना जा सकता है।
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काठमांडू में बालेन शाह के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद भारत और नेपाल के रिश्तों में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन हाल ही में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल ने ऐतराज जताकर पुराने विवाद को फिर से ताजा कर दिया है। नेपाल ने लिपुलेख के रास्ते यात्रा पर आपत्ति जताते हुए भारत और चीन को राजनयिक नोट भेजा है, जिसमें कहा गया है कि बिना उसकी सहमति के व्यापार और पारगमन नहीं हो सकता। भारत ने स्पष्ट किया है कि लिपुलेख उसका हिस्सा है। यह विवाद नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है, जिसका उपयोग नेताओं ने जनभावनाओं को भड़काने के लिए किया है। बालेन शाह के सामने यह चुनौती है कि यदि वे भारत के साथ नरमी बरतते हैं, तो इसे कमजोरी के रूप में देखा जा सकता है। नेपाल की विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया औपचारिक है, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते बालेन शाह को सीमा विवाद को उठाना पड़ा है।
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यह विवाद नेपाल की आंतरिक राजनीति में महत्वपूर्ण है और इससे बालेन शाह की सरकार की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
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