पाकिस्तान की सरकार ने कट्टरपंथियों के दबाव में लाहौर में हिंदू-सिख नामों की बहाली टाली
पाकिस्तान में कट्टरपंथियों के आगे झुकी सरकार, लाहौर में सड़कों और मोहल्लों के हिंदू-सिख नाम रखने पर लगी रोक
Image: Nbt Navbharattimes
पाकिस्तान की PML-N सरकार ने लाहौर में सड़कों और मोहल्लों के पुराने हिंदू और सिख नामों को बहाल करने का निर्णय कट्टरपंथियों के दबाव में टाल दिया है। यह फैसला पहले किया गया था लेकिन अब इसे वापस ले लिया गया है।
- 01लाहौर में 9 स्थलों के नाम बदले गए थे, जैसे इस्लामपुर को कृष्ण नगर।
- 02यह नाम बदलने का अभियान लाहौर हेरिटेज एरियाज रिवाइवल पहल का हिस्सा था।
- 03पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ ने इस फैसले को पहले मंजूरी दी थी।
- 04कट्टरपंथियों के विरोध के कारण सरकार ने नामों की बहाली का निर्णय टाल दिया।
- 05डेप्युटी कमिश्नर ने पुष्टि की कि अभी तक कोई नया फैसला नहीं लिया गया है।
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पाकिस्तान की PML-N सरकार ने लाहौर में सड़कों और मोहल्लों के पुराने हिंदू और सिख नामों को बहाल करने का निर्णय कट्टरपंथियों के दबाव में टाल दिया है। यह प्रस्ताव पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ के नेतृत्व में लाया गया था, जिसका उद्देश्य लाहौर की ऐतिहासिक विरासत को पुनर्स्थापित करना था। इस पहल के तहत, मार्च में लाहौर में कम से कम 9 स्थलों के नाम बदले गए थे, जैसे इस्लामपुर को कृष्ण नगर और बाबरी मस्जिद चौक को जैन मंदिर चौक। हालांकि, कट्टरपंथियों के विरोध के चलते सरकार ने इस फैसले को वापस ले लिया है। लाहौर के डेप्युटी कमिश्नर ने बताया कि अभी तक इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यह स्थिति सरकार के लिए एक चुनौती बन गई है, क्योंकि कट्टरपंथियों ने इस मुद्दे को धार्मिक रंग देकर आलोचना की है।
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लाहौर में हिंदू और सिख नामों की बहाली का निर्णय टालने से धार्मिक अल्पसंख्यकों की पहचान और सांस्कृतिक विरासत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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