प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्डिक यात्रा: हरित प्रौद्योगिकी में नई साझेदारी का आरंभ
प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्डिक यात्रा, भारत-नॉर्डिक हरित संबंधों में एक नए अध्याय का सूत्रपात

Image: Zee News
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे और स्वीडन की यात्रा के दौरान तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस यात्रा का उद्देश्य हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार में सहयोग बढ़ाना है, जिससे भारत की नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
- 01भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा का लक्ष्य निर्धारित किया है।
- 02नॉर्डिक देशों के साथ हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की गई।
- 03भारत और नॉर्वे ने हरित रणनीतिक साझेदारी को अपग्रेड किया।
- 04स्वीडन के साथ संयुक्त कार्य योजना 2026-2030 में हरित ऊर्जा पर जोर दिया गया है।
- 05आर्कटिक परिषद में भारत की पर्यवेक्षक स्थिति का स्वागत किया गया।
Advertisement
In-Article Ad
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नॉर्वे और स्वीडन की यात्रा की, जिसमें उन्होंने तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार में सहयोग को बढ़ावा देना था। हाल के ऊर्जा संकट के चलते, भारत की नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने में नॉर्डिक देशों की विशेषज्ञता महत्वपूर्ण हो सकती है। मोदी ने नॉर्डिक देशों के प्रधानमंत्रियों के साथ मिलकर एक हरित प्रौद्योगिकी और नवाचार रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की। इस यात्रा में जलवायु कार्रवाई, ऊर्जा सुरक्षा, और नीली अर्थव्यवस्था पर सहयोग को गहरा करने पर सहमति बनी। भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा का लक्ष्य रखा है, और इसने पहले ही 50% गैर-जीवाश्म हिस्सेदारी का मील का पत्थर पार कर लिया है। नॉर्डिक देशों के साथ सहयोग से भारत की हरित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता आएगी।
Advertisement
In-Article Ad
भारत-नॉर्डिक सहयोग से भारत की नवीकरणीय ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी में सुधार होगा, जो घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाएगा।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
आपको भारत-नॉर्डिक सहयोग के बारे में क्या लगता है?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।





