वाराणसी में गंगा की सफाई की चुनौतियाँ: अस्सी से तुलसी घाट तक गंदगी का साम्राज्य
Varanasi News: अस्सी से तुलसी घाट तक टीले जैसी मिट्टी और मलबे, जहां स्नान कर रहे, वहीं पेशाब की बदबू

Image: Amar Ujala
वाराणसी के अस्सी से तुलसी घाट तक गंगा की स्थिति गंभीर है, जहां गंदगी और प्रदूषण से लोग प्रभावित हैं। बीएचयू के वैज्ञानिकों ने गंगा में अमोनियम आयनों की मात्रा 1.21 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई है, जबकि बीओडी 4 मिलीग्राम प्रति लीटर है।
- 01गंगा की बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 4 मिलीग्राम प्रति लीटर है, जो सामान्य स्तर से अधिक है।
- 02अस्सी घाट से तुलसी घाट तक गंदगी, कूड़े और मलबे का ढेर है, जहां स्नान करने वाले लोग भी प्रभावित हो रहे हैं।
- 03बीएचयू के शोध में प्रदूषण के उच्च स्तर के कारण शैवाल का बढ़ना पाया गया है।
- 04वरुणा नदी में बीओडी 56 मिलीग्राम प्रति लीटर है, जो गंगा की तुलना में बहुत अधिक है।
- 05आईआईटी बीएचयू में गंगा की सफाई के लिए चार प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनमें फ्रांस और डेनमार्क की तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
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वाराणसी में गंगा की सफाई की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अस्सी से तुलसी घाट तक के क्षेत्र में गंदगी और मलबे का ढेर है, जहां लोग स्नान कर रहे हैं। बीएचयू के वैज्ञानिकों के अनुसार, गंगा में अमोनियम आयनों की मात्रा 1.21 मिलीग्राम प्रति लीटर पाई गई है, जबकि गंगा की बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 4 मिलीग्राम प्रति लीटर है, जो सामान्य स्तर से अधिक है। इस क्षेत्र में गंदगी के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे शैवाल का विकास हो रहा है। वहीं, वरुणा नदी में बीओडी 56 मिलीग्राम प्रति लीटर है। आईआईटी बीएचयू में गंगा की सफाई के लिए चार प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जो 2026 और 2027 में समाप्त होंगे। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स से गंगा की स्वच्छता में सुधार होगा।
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गंगा के प्रदूषण से स्थानीय निवासियों और स्नान करने वालों को स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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