थाई एप्पल की खेती: करौली के किसानों के लिए लाभ का नया अवसर
कम मेहनत में ज्यादा कमाई का फॉर्मूला! जानिए कैसे थाई एप्पल की खेती बना सकती है किसानों को मालामाल
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करौली जिले के किसान अब थाई एप्पल की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो कम लागत, कम पानी और उच्च लाभ का वादा करती है। यह खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में आसान है और किसानों को एक ही खेत से कई फसलों का उत्पादन करने की सुविधा देती है।
- 01थाई एप्पल की खेती से किसान हर साल लाखों रुपये कमा सकते हैं।
- 02इस फसल को लगाने के बाद 2-3 वर्षों में उत्पादन शुरू होता है।
- 03थाई एप्पल की खेती में पानी की आवश्यकता पारंपरिक फसलों की तुलना में कम होती है।
- 04किसान थाई एप्पल के साथ आलू, मूंगफली और अन्य फसलों की खेती भी कर सकते हैं।
- 05इस फसल की मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है।
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करौली जिले के किसान अब परंपरागत खेती के बजाय थाई एप्पल की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। यह खेती कम लागत, कम पानी और बेहतर मुनाफे के कारण किसानों के लिए आकर्षक साबित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, थाई एप्पल के पौधे लगाने के बाद 2-3 वर्षों में अच्छी मात्रा में फल मिलना शुरू हो जाता है। हर साल फरवरी-मार्च में पौधों की छंटाई की जाती है, और अक्टूबर-नवंबर में फल उत्पादन शुरू होता है। थाई एप्पल की खेती में पानी की आवश्यकता पारंपरिक फसलों की तुलना में कम होती है, जिससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों में कमी आती है। इसके साथ ही, किसान आलू, मूंगफली और सब्जियों जैसी अन्य फसलों की खेती भी कर सकते हैं, जिससे उन्हें आय के कई स्रोत मिलते हैं। इस फसल की बढ़ती मांग के कारण, करौली के कई किसान अब परंपरागत खेती छोड़कर थाई एप्पल की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
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थाई एप्पल की खेती से किसानों को आर्थिक लाभ मिल रहा है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो सकता है।
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