सीबीएसई 12वीं रिजल्ट पर खाड़ी देशों में भारतीय छात्रों की चिंता
'बस एक मौका और दे दो'.. सीबीएसई 12वीं रिजल्ट से परेशान हुए विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय बच्चे

Image: News 18 Hindi
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 12वीं के परिणामों ने खाड़ी देशों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों में निराशा फैला दी है। छात्रों का आरोप है कि मूल्यांकन प्रणाली में खामियां हैं, जिससे उनके अंक कम आए हैं, जो उन्हें शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश पाने से रोक रहे हैं। अब वे दोबारा परीक्षा कराने या मानदंडों में ढील देने की मांग कर रहे हैं।
- 01खाड़ी देशों में भारतीय छात्रों ने सीबीएसई के 12वीं परिणामों पर नाराजगी जताई है, जिससे उनके भविष्य पर संकट आ गया है।
- 02DASA योजना के तहत 12वीं में 75% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है, लेकिन कई छात्रों के अंक कम आने से वे इस कट-ऑफ को पार नहीं कर पा रहे हैं।
- 03छात्रों का दावा है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की सही तरीके से जांच नहीं की गई, जिससे उन्हें कम अंक मिले।
- 04अभिभावकों और छात्रों ने शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई से दोबारा परीक्षा कराने की मांग की है।
- 05छात्रों का कहना है कि सीबीएसई का मूल्यांकन मॉडल उनकी परिस्थितियों को समझने में असफल रहा है।
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 12वीं के परिणामों के बाद खाड़ी देशों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों और उनके परिवारों में निराशा का माहौल है। ओमान, यूएई, कतर और सऊदी अरब में रहने वाले छात्रों ने आरोप लगाया है कि सीबीएसई के मूल्यांकन मॉडल में गंभीर खामियां हैं, जिसके कारण उनके अंक उम्मीद से बहुत कम आए हैं। इस साल कई छात्रों के लिए DASA योजना के तहत 75% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है, लेकिन कम अंक आने के कारण वे इस कट-ऑफ को पार नहीं कर पा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की ठीक से जांच नहीं की गई है, जिससे उनके भविष्य पर संकट आ गया है। इसके चलते, खाड़ी देशों में भारतीय परिवारों ने सीबीएसई और सरकार से दोबारा परीक्षा कराने या मानदंडों में ढील देने की मांग की है। छात्रों का मानना है कि सीबीएसई का मूल्यांकन मॉडल उनकी वास्तविक परिस्थितियों को समझने में असफल रहा है। अब देखना है कि सीबीएसई इस अंतरराष्ट्रीय दबाव और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए क्या कदम उठाता है।
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इस स्थिति का प्रभाव खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है, जिससे उनकी उच्च शिक्षा की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं।
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