संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों की कमजोरी के पीछे की प्रमुख वजहें
दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन क्यों पड़ रहे कमजोर? ये 8 बड़ी वजह हैं अहम

Image: Ndtv
एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में तैनात सैनिकों की संख्या 78,633 रह गई है, जो 2016 के मुकाबले 49% कम है। प्रमुख कारणों में वित्तीय कमी, बड़े देशों का योगदान न देना और सुरक्षा परिषद में सहमति की कमी शामिल हैं।
- 012025 में UN शांति मिशनों में तैनात सैनिकों की संख्या 78,633 है, जो 2016 के मुकाबले 49% कम है।
- 02UN शांति अभियानों के लिए 2 अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग की कमी आई है, जो कुल बजट का 35% है।
- 03अमेरिका ने कई मिशनों पर सख्त रुख अपनाया है, जैसे कि लेबनान में तैनात युनाइटेड नेशन्स अस्थायी फोर्स को बंद करने की मांग।
- 04UN सुरक्षा परिषद में सहमति बनाना मुश्किल हो रहा है, जिससे नए मिशनों की शुरुआत में बाधा आ रही है।
- 05भारत 2025 में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में चौथे स्थान पर है, जबकि युगांडा पहले स्थान पर है।
Advertisement
In-Article Ad
स्वीडन के स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में तैनात सैनिकों की संख्या घटकर 78,633 रह गई है, जो 2016 के मुकाबले 49% कम है। इस गिरावट के प्रमुख कारणों में वित्तीय कमी शामिल है, जहां जुलाई 2025 तक UN शांति अभियानों के लिए 2 अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग कम हो गई है। अमेरिका, जो कि UN शांति अभियानों का सबसे बड़ा वित्तदाता है, ने कई मिशनों पर खर्च कम करने का दबाव महसूस किया है। इसके अलावा, UN सुरक्षा परिषद में सहमति बनाना भी कठिन हो रहा है, जिससे नए मिशनों की शुरुआत में बाधा आ रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत, जो कि UN शांति अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, 2025 में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में चौथे स्थान पर है। यदि यह स्थिति बनी रही, तो अंतरराष्ट्रीय शांति व्यवस्था कमजोर हो सकती है।
Advertisement
In-Article Ad
यदि UN शांति अभियानों की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो यह वैश्विक संघर्षों को रोकने की क्षमता को कमजोर कर सकता है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि UN शांति मिशनों की स्थिति में सुधार संभव है?
Connecting to poll...
More about संयुक्त राष्ट्र
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।






