उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नीयत में बदलाव की आवश्यकता
उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में सुधार: नीति नहीं, नीयत बदलने की है जरूरत
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उत्तराखंड में शिक्षा सुधार के लिए नीतियों के बजाय नीयत में बदलाव की आवश्यकता है। सरकारी विद्यालयों में घटती छात्र संख्या और सीखने के प्रतिफल में कमी के लिए शिक्षक, अधिकारी, अभिभावक और जनप्रतिनिधि सभी जिम्मेदार हैं। शिक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
- 01शिक्षा सुधार के लिए नीतियों के बजाय नीयत में बदलाव जरूरी है।
- 02सरकारी विद्यालयों में घटती छात्र संख्या और सीखने के प्रतिफल में कमी गंभीर समस्या है।
- 03शिक्षकों और अभिभावकों के बीच संवाद में कमी से छात्रों की सीखने की क्षमता प्रभावित हो रही है।
- 04विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है।
- 05विद्या समीक्षा केंद्र को सक्रिय रूप से काम करना चाहिए, केवल डाटा संग्रह केंद्र नहीं रहना चाहिए।
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उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केवल नीतिगत बदलावों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि नीयत में भी बदलाव की आवश्यकता है। देहरादून में 'दैनिक जागरण' के अकादमिक विमर्श में पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीमा जौनसारी ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में घटती छात्र संख्या और सीखने के प्रतिफल में कमी के लिए सभी पक्ष जिम्मेदार हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षा को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार मानते हुए जमीनी स्तर पर गंभीर प्रयास करने होंगे। जौनसारी ने शिक्षकों और अभिभावकों के बीच संवाद की कमी को छात्रों की सीखने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाला बताया। इसके अलावा, उन्होंने विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी को भी शिक्षा की गुणवत्ता में कमी का एक बड़ा कारण बताया। वर्तमान में विद्या समीक्षा केंद्र केवल डाटा संग्रह केंद्र बनकर रह गया है, जबकि इसे शिक्षण गुणवत्ता और छात्रों के सीखने के स्तर पर सक्रिय रूप से काम करना चाहिए।
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शिक्षा व्यवस्था में सुधार से सरकारी विद्यालयों की स्थिति में सुधार हो सकता है, जिससे छात्रों की सीखने की क्षमता बढ़ेगी।
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