राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रशिक्षण वर्ग: त्याग और बलिदान की कहानी
'स्वयंसेवकों के त्याग, संघर्ष और बलिदान के बूते यहां तक पहुंचा संघ', प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन में बोले अतुल लिमये
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने नागपुर में आयोजित कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय के उद्घाटन में संघ के संघर्ष और बलिदान की चर्चा की। इस 25 दिवसीय प्रशिक्षण में 880 शिक्षार्थी भाग ले रहे हैं, जिसमें झारखंड के 18 शिक्षार्थी भी शामिल हैं।
- 01RSS के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने संघ के संघर्ष और बलिदान को सराहा।
- 02प्रशिक्षण वर्ग में 880 शिक्षार्थी भाग ले रहे हैं, जिनमें झारखंड के 18 हैं।
- 03संघ शिक्षा वर्ग की शुरुआत 1927 में हुई थी।
- 04प्रशिक्षण में शारीरिक और बौद्धिक विकास पर जोर दिया गया है।
- 05कार्यक्रम का समापन 4 जून को होगा, जिसमें सरसंघचालक मोहन भागवत का मार्गदर्शन मिलेगा।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये ने नागपुर में आयोजित कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय के उद्घाटन समारोह में संघ के संघर्ष और बलिदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ की शताब्दी की यात्रा में उपहास, उपेक्षा और तीन बार प्रतिबंध का सामना करना पड़ा है, लेकिन स्वयंसेवकों के त्याग और संघर्ष के कारण संघ आज यहां तक पहुंचा है। इस 25 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में भारत के 46 प्रांतों से 880 शिक्षार्थी भाग ले रहे हैं, जिनमें झारखंड के 18 शिक्षार्थी भी शामिल हैं। लिमये ने बताया कि संघ शिक्षा वर्ग की शुरुआत 1927 में हुई थी और यह व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रशिक्षण वर्ग में शारीरिक और बौद्धिक विकास पर जोर दिया गया है, जिससे स्वयंसेवकों को एकता और सिद्धता की अनुभूति होती है। कार्यक्रम का समापन 4 जून को होगा, जिसमें सरसंघचालक मोहन भागवत का मार्गदर्शन मिलेगा।
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यह प्रशिक्षण वर्ग स्थानीय स्वयंसेवकों के विकास और संगठन में मदद करेगा, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
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