तेंदूपत्ता संग्रहण से छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान
तेंदूपत्ता संग्रहण : ‘हरा सोना’ बदलेगा तस्वीर; छत्तीसगढ़ में 13 लाख संग्राहक परिवारों को मिलेंगे ₹920 करोड़
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छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण से 13 लाख परिवारों को ₹920 करोड़ का लाभ मिलने की उम्मीद है। इस साल संग्रहण दर में वृद्धि के साथ, सरकार ने पारदर्शी भुगतान प्रणाली लागू की है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
- 01तेंदूपत्ता संग्रहण से 13 लाख परिवारों को ₹920 करोड़ का लाभ मिलेगा।
- 02संग्रहण दर में वृद्धि, प्रति मानक बोरा राशि ₹4,000 से बढ़कर ₹5,500 हुई।
- 03नए फड़ों की स्थापना से संग्रहण में वृद्धि की उम्मीद।
- 04पारदर्शी भुगतान प्रणाली से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।
- 05तेंदूपत्ता को टिकाऊ ग्रामीण विकास से जोड़ा गया है।
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छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण, जिसे 'हरा सोना' कहा जाता है, आदिवासी और वनवासी परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है। इस साल, राज्य सरकार ने संग्रहण दर में वृद्धि की है, जिससे प्रति मानक बोरा राशि ₹5,500 हो गई है। इससे 13 लाख से अधिक परिवारों को ₹920 करोड़ का लाभ मिलने की उम्मीद है। तेंदूपत्ता का उपयोग बीड़ी उद्योग में होता है और इसकी मांग हर साल बनी रहती है। नए फड़ों की स्थापना और पारदर्शी भुगतान प्रणाली के माध्यम से, सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया है। इस साल 15 लाख से अधिक मानक बोरे तेंदूपत्ता एकत्र करने की योजना है, जिससे लाखों परिवारों की आमदनी बढ़ेगी।
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तेंदूपत्ता संग्रहण से ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय बाजार और छोटे व्यापार को भी लाभ होगा।
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