सीएम थलापति विजय ने सफेद तौलिया हटाकर परंपरा को तोड़ा
कुर्सी पर सफेद तौलिया लगाने का रिवाज कहां से शुरू हुआ? सीएम थलापति विजय ने जिससे बनाई दूरी

Image: Ndtv
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय ने सरकारी दफ्तरों में कुर्सियों पर लगे सफेद तौलिये को हटाने का निर्णय लिया। यह परंपरा ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई थी, जब अधिकारियों ने गर्मी से बचने के लिए तौलिये का उपयोग किया। अब यह एक स्टेटस सिंबल बन गया है।
- 01सीएम विजय ने सफेद तौलिया हटाने का निर्णय एक पर्यावरण एक्टिविस्ट लिसिप्रिया कंगुजम की अपील के बाद लिया।
- 02ब्रिटिश शासन के दौरान सफेद तौलिये का उपयोग गर्मी से बचने और सफाई के लिए किया जाता था।
- 03आज यह सफेद तौलिया एक स्टेटस सिंबल और वीआईपी संस्कृति का प्रतीक बन चुका है।
- 04सरकारी दफ्तरों में एसी होने के बावजूद, सफेद तौलिया कुर्सी पर रुतबे का प्रतीक माना जाता है।
- 05यह परंपरा अब छोटे अधिकारियों द्वारा भी अपनाई जाती है, जो अपने रुतबे को दिखाने के लिए तौलिया का उपयोग करते हैं।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय ने हाल ही में सरकारी दफ्तरों में कुर्सियों पर लगे सफेद तौलिये को हटाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। यह कदम मणिपुर की पर्यावरण एक्टिविस्ट लिसिप्रिया कंगुजम की अपील के बाद उठाया गया। सफेद तौलिये की परंपरा ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई थी, जब अधिकारियों ने गर्मी से बचने के लिए इसका उपयोग किया। उस समय यह तौलिया कुर्सी को साफ रखने और पसीने को सोखने का काम करता था। हालांकि, आज यह तौलिया एक स्टेटस सिंबल बन चुका है, जो वीआईपी संस्कृति का प्रतीक है। छोटे से छोटे अधिकारी भी अपने रुतबे को दिखाने के लिए कुर्सी पर सफेद तौलिया रखते हैं, भले ही सरकारी दफ्तरों में कई एयर कंडीशनर लगे हों। सीएम विजय के इस निर्णय ने इस पुरानी परंपरा पर सवाल उठाया है और इसे खत्म करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
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सीएम विजय के इस निर्णय से सरकारी दफ्तरों की संस्कृति में बदलाव आएगा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
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