ज्येष्ठ अधिक मास 2026: 17 मई से शुरू, धार्मिक महत्व और नियम
17 मई से शुरू होगा ज्येष्ठ अधिक मास, फिर 2037 में बनेगा ऐसा संयोग; नोट करें 29 दिनों के नियम
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वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। यह धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण समय है, जिसमें विशेष पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना का महत्व है। अगली बार ऐसा संयोग 2037 में बनेगा।
- 01ज्येष्ठ अधिक मास का आरंभ 17 मई 2026 से होगा और यह 15 जून तक चलेगा।
- 02इस दौरान ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष 29 जून को पूर्णिमा तक चलेगा।
- 03यह धार्मिक संयोग वर्षों बाद बन रहा है और अगली बार 2037 में देखने को मिलेगा।
- 04इस महीने में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है।
- 05श्रद्धालु व्रत, कथा, भजन-कीर्तन और तीर्थ स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करने की तैयारी कर रहे हैं।
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वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास का आरंभ 17 मई से होगा और यह 15 जून तक चलेगा। इसके बाद शुद्ध ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा तक चलेगा। पुजारी विनय पांडेय के अनुसार, यह धार्मिक दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ संयोग है, जो वर्षों बाद बन रहा है। अगली बार ऐसा योग वर्ष 2037 में देखने को मिलेगा। अधिक मास को सनातन धर्म में भगवान विष्णु की उपासना, दान-पुण्य, जप-तप और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए शुभ माना गया है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। श्रद्धालु इस समय पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना पर विशेष ध्यान देते हैं। अधिक मास में भजन-कीर्तन और तीर्थ स्नान करना लाभकारी माना जाता है। यह महीना आत्मशुद्धि और धर्म-कर्म के लिए श्रेष्ठ अवसर है।
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इस समय धार्मिक अनुष्ठानों और साधनाओं के लिए विशेष अवसर उपलब्ध है, जिससे श्रद्धालु आत्मिक शुद्धि और पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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