दिल्ली विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विकसित की ऊर्जा रूपांतरण तकनीक
कलाई की हलचल से चलेगी घड़ी, सड़क की कंपन से जलेगी स्ट्रीट लाइट; DU के वैज्ञानिकों ने विकसित की नई तकनीक
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दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है जो वेस्ट एनर्जी को उपयोगी विद्युत ऊर्जा में बदल सकती है। यह तकनीक सड़क की कंपन, मोशन और गर्मी को बिजली में परिवर्तित कर सकती है, जिससे स्ट्रीट लाइट और अन्य उपकरण बिना बैटरी के काम कर सकेंगे।
- 01नई तकनीक वेस्ट एनर्जी को उपयोगी विद्युत ऊर्जा में बदलने में सक्षम है।
- 02सड़क की कंपन से स्ट्रीट लाइट जलाने का प्रयोग किया जाएगा।
- 03शोध में लीड-फ्री और पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का उपयोग किया गया है।
- 04इस तकनीक के संभावित उपयोग रेलवे और मेट्रो स्टेशनों पर हो सकते हैं।
- 05शोध का कुल खर्च लगभग 40 लाख रुपये है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है, जो वेस्ट एनर्जी को उपयोगी विद्युत ऊर्जा में बदल सकती है। इस तकनीक का उद्देश्य पीजो-इलेक्ट्रिक, थर्मो-इलेक्ट्रिक और पायरो-इलेक्ट्रिक तकनीकों का उपयोग करके सड़क पर गाड़ियों की कंपन, मोशन और गर्मी को बिजली में परिवर्तित करना है। यह तकनीक स्ट्रीट लाइट्स को बिना बैटरी के जलाने में सक्षम होगी। शोधकर्ता प्रो. विजयालक्ष्मी नंदा, प्रो. मोनिका तोमर और अन्य ने बताया कि इस शोध में लीड-फ्री सामग्री का उपयोग किया गया है, जो पर्यावरण के लिए सुरक्षित है। इस तकनीक को रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लागू किया जा सकता है। शोध की कुल लागत लगभग 40 लाख रुपये है।
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यह तकनीक ऊर्जा की बर्बादी को कम कर सकती है और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दे सकती है।
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