सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले की सुनवाई पूरी की, फैसला सुरक्षित
सबरीमाला रेफरेंस केस में सुप्रीम कोर्ट में पूरी हुई सुनवाई, फैसला रखा सुरक्षित, समझिए पूरा विवाद
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सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला रेफरेंस केस की सुनवाई पूरी कर ली है, जिसमें 9 जजों की बेंच ने धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के मुद्दों पर विचार किया। यह मामला केवल सबरीमाला मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में धार्मिक अधिकारों की सीमा तय करने का भी है।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले में 16 दिनों की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा।
- 02मामले में धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और संविधानिक अधिकारों के बड़े सवाल उठाए गए।
- 03सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने 7 प्रमुख संवैधानिक प्रश्नों पर विचार किया।
- 04केंद्र सरकार ने अदालत की भूमिका पर सवाल उठाया, जबकि कई वकीलों ने समानता के सिद्धांत का समर्थन किया।
- 05सभी पक्ष 29 मई तक लिखित दलीलें जमा करेंगे, उसके बाद फैसला सुनाया जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला रेफरेंस केस की सुनवाई पूरी कर ली है, जिसमें 9 जजों की बेंच ने 16 दिनों तक विभिन्न मुद्दों पर विचार किया। यह मामला केवल सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और संविधानिक अधिकारों की सीमा को भी परिभाषित करता है। 2018 में, 5 जजों की बेंच ने सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को असंवैधानिक बताया था, जिसके खिलाफ पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं। सुनवाई के दौरान, अदालत ने सात प्रमुख सवालों पर विचार किया, जिनमें धार्मिक प्रथाओं की वैधता और संविधान के मूल्यों का संबंध शामिल है। इस दौरान, जस्टिस B. V. नागरत्ना ने भारत की विविध धार्मिक परंपराओं की स्थायी पहचान पर जोर दिया। केंद्र सरकार ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के माध्यम से कहा कि अदालतें धार्मिक मान्यताओं के निर्णय के लिए उपयुक्त मंच नहीं हैं। सभी पक्षों को 29 मई तक अपनी लिखित दलीलें जमा करने के लिए कहा गया है।
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इस फैसले से धार्मिक स्थलों में महिलाओं के प्रवेश और समानता के अधिकारों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।
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